ई-रिक्शा मामले पर सुनवाई करते हुए दिल्ली हाईकोर्ट ने आज भी कोई फैसला नहीं दिया। कोर्ट ने अपना फैसला सुरक्षित रखते हुए 9 सितंबर तक ई-रिक्शा पर प्रतिबंध जारी रखा है। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने सरकार को फटकार लगाते हुए कहा कि पहले तो आप खुद ही नहीं चाहते थे कि ई-रिक्शा चले। फिर अब इतना चिंतित क्यों हो रहे हैं।
गौरतलब है कि पहले इस मामले की सुनवाई बृहस्पतिवार को होने वाली थी जो टल गई थी। बृहस्पतिवार को अदालत ने एमसीडी द्वारा पेश जवाब को नकार दिया। वहीं, केंद्र सरकार ने ई-रिक्शा चालकों व मालिकों के जीने के अधिकार के नाम पर राहत की मांग की थी। अदालत ने सरकार को विस्तृत प्रस्ताव पेश करने का निर्देश देते हुए कहा कि वे उसका अध्ययन करने के बाद ही कोई फैसला करेंगे।
बृहस्पतिवार को न्यायमूर्ति बीडी अहमद व न्यायमूर्ति सिद्घार्थ मृदुल की खंडपीठ के समक्ष केंद्र सरकार की और से पेश अतिरिक्त सॉलिसीटर जनरल पिंकी आनंद ने ई-रिक्शा चालाकों के जीने व खाने पीने के अधिकार का मुद्दा बनाकर अदालत से निर्देश देने का आग्रह किया था।
सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार, दिल्ली सरकार, एमसीडी, याची व ई-रिक्शा चालकों की यूनियन किसी के पास भी खंडपीठ के सवालों का ठोस जवाब नहीं था। उधर, एमसीडी ने कहा कि हमने 13 अगस्त को अपना जवाब दाखिल कर दिया था लेकिन रजिस्टरी ने जवाब अदालत में नहीं भेजा। आखिर जब रजिस्टरी से जवाब मंगवाया गया तो खंडपीठ ने उसे नकार दिया। अदालत ने कहा था कि आप रजिस्टरी पर दोष लगा रहे हैं लेकिन जवाब शपथपत्र के साथ दाखिल नहीं किया गया तो कैसे स्वीकार किया जा सकता है।