इंटरनेट पर अश्लीलता रोकने को लेकर कई बार मुखर होने के बाद भी सरकार सुस्त बैठी है।
इंटरनेट पर नियमन को लेकर सरकार ने संसद में बाकायदा सर्वसम्मति बनाने का भरोसा दिया। मगर सरकार ने इस सिलसिले में अब तक कोई कोशिश नहीं की।
हालात यह हैं कि इंटरनेट पर अश्लीलता की भरमार होती जा रही है। बड़ी शख्सियत को लेकर भद्दे मजाक और टिप्पणियां जमकर की जा रही है। लेकिन सरकार ने इस दिशा में बातचीत की प्रक्रिया भी शुरू नहीं की है।
जबकि सूचना तकनीक से जुड़े विशेषज्ञ लोगों और इंटरनेट कंपनियों को जागरूक करने पर जोर दे रहे हैं। सोशल मीडिया पर लगाम कसने का दूरसंचार मंत्री कपिल सिब्बल ने कई बार दावा ठोका।
सोशल मीडिया समेत कई बड़ी इंटरनेट कारोबारी कंपनियों के प्रमुख अधिकारियों से बात भी की। इसके बाद हो हल्ला होने के बाद सरकार ने अपने पांव खींच लिए।
वहीं कई नामी वेबसाइटों पर आपत्तिजनक सामग्री हटाने को लेकर कोर्ट ने आदेश भी दिया है। मगर सरकार इसे सही परिप्रेक्ष्य में उठाने में नाकामयाब रही है।
सरकार इस पर चर्चा छेड़ने की बात तो कहती है पर अभी तक कोई पहल नहीं की गई है। वहीं इंटरनेट नियमन को लेकर सूचना तकनीक मामलों के विशेषज्ञों का नजरिया अलग है।
सूचना तकनीक विशेषज्ञ पवन दुग्गल कहते हैं कि सेंसरशिप की बजाय लोगों को जागरूक करने की जरूरत है। उपभोक्ता सेंसरशिप से खार खाते हैं।
लिहाजा लोगों को इंटरनेट से संबंधित कानून के बारे में जागरूक किया जाए कि इसका दुरुपयोग देश के खिलाफ न हो। इससे आम व्यक्ति भी दुरुपयोग रोकेगा।
वहीं सेल्फ सेंशरशिप अच्छा मुद्दा है। कम्युनिटी खुद नियंत्रण रखेगी। कोई उल्लंघन करता है। तो इंटरनेट कम्युनिटी खुद इसका विरोध करेगी।
दुग्गल कहते हैं कि अधिकांश कंपनियों को कानून की जानकारी नहीं है। यह भी बहुत बड़ा कारण है, जिसकी वजह से कुछ असामाजिक तत्व गलत फायदा उठाते हैं।