बाला साहेब ठाकरे का अस्थि विसर्जन भी विवाद से बच नहीं सका। बृहस्पतिवार सुबह अस्थियों के सिविल लाइंस पहुंचने पर कांग्रेसियों ने काला झंडा दिखाकर विरोध जताया। दूसरी ओर सिविल लाइंस चौराहे पर अस्थियों को जनता के दर्शन के लिए थोड़ी देर तक रखने के बाद संगम में विसर्जित कर दिया गया।
शिव सेना के सचिव राजेश दुबे और उत्तर प्रदेश के अध्यक्ष उदय नाथ पांडे अस्थियों को लेकर सुबह शहर पहुंचे। लखनऊ से सड़क मार्ग से लाए गए अस्थि कलश को सिविल लाइंस में सुभाष चौराहे पर रखा गया। इसी दौरान कांग्रेसियों का एक समूह नारेबाजी करता हुआ पहुंच गया और काले झंडे दिखाए।
कांग्रेसियों का कहना था कि बाला साहेब ने महाराष्ट्र में यूपी और बिहार वालों को प्रताड़ित कर भगाया। इससे बहुतों की रोजी-रोटी मारी गई। क्षेत्रवाद को बढ़ावा देने वाले नेता की अस्थियों को संगम में विसर्जित न किया जाए। पुलिस के पहुंचने के बाद कांग्रेसी भाग गए।
इसके थोड़ी देर बाद अस्थियों को वाहनों के काफिले के साथ संगम क्षेत्र ले जाया गया। वीआईपी घाट से पीएसी की नाव से अस्थियों को संगम तक पहुंचाया गया। फिर, आनंद गिरि की अगुवाई में परंपरा, श्रद्धा और वैदिक मंत्रोच्चार के साथ अस्थियों को संगम में प्रवाहित कर दिया गया। उदयनाथ पांडे ने बताया कि मुंबई से दो अस्थि कलश लाए गए हैं।
इनमें से एक संगम में प्रवाहित किया गया। दूसरा, शुक्रवार को वाराणसी में प्रवाहित किया जाएगा। इसमें ठाकरे परिवार के सदस्य भी शामिल हो सकते हैं। विसर्जन में स्थानीय शिव सैनिक पंकज मिश्रा, शिव विशाल गुप्ता, आशीष तिवारी, विहिप के पवन श्रीवास्तव, धर्मेंद्र मिश्रा, राहुल शर्मा, सारंग श्रीवास्तव, मिलन साहू, प्रदीप चौरसिया आदि भी शामिल रहे।