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पढ़िए, बदायूं गैंगरेप की जांच में हुए EXCLUSIVE खुलासे

Mon, 30 Jun 2014 11:31 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, बदायूं
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कटरा सआदतगंज कांड में दोनों बहनों के शवों का पोस्टमार्टम करने वाले तीन डॉक्टरों का पैनल भी सीबीआई के रडार पर आ गया है। जांच एजेंसी की सहयोगी फॉरेंसिक टीम ने पोस्टमार्टम रिपोर्ट में कई खामियां पकड़ी हैं। फॉरेंसिक टीम ने माना है कि संगीन मामले की पोस्टमार्टम रिपोर्ट में भी खानापूरी की गई है। इस सिलसिले में सीबीआई अब तक कई बार पोस्टमार्टम करने वाले डॉक्टरों के पैनल से पूछताछ कर चुकी है।
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28 मई को दोनों बहनों का पोस्टमार्टम डॉ. अवधेश कुमार, डॉ. राजीव गुप्ता और डॉ. पुष्पापंत त्रिपाठी ने किया था। दोनों लड़कियों का पोस्टमार्टम रात में 7.05 बजे से 9.15 बजे तक चला था। डॉक्टरों को छोटी लड़की के पोस्टमार्टम में 50 और बड़ी के पोस्टमार्टम में 40 मिनट का वक्त लगा।

गौर करने वाली बात यह है कि डॉक्टरों ने दोनों बहनों के साथ रेप की पुष्टि तो की लेकिन कई तकनीकी खामियां छोड़ दी। खामियों को पहले स्टेट फॉरेंसिक टीम और बाद में सेंट्रल फॉरेंसिक टीम ने पकड़ा और खामियों की लिस्ट सीबीआई को थमा दी।
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बिना सिर खोले किया पोस्टमार्टम

बड़ी लड़की की पोस्टमार्टम रिपोर्ट में लिखा गया है कि उसके नाजुक अंगों के नीचे जख्म है। इसमें कई बातों को जिक्र स्पष्ट नहीं किया गया है। छोटी लड़की के मामले में भी पोस्टमार्टम रिपोर्ट उलझी हुई है। डॉक्टरों के पैनल ने दोनों लड़कियों के मरने की वजह दम घुटना बताई है लेकिन पोस्टमार्टम के दौरान उनके सिर को खोलकर मस्तिष्क की लालिमा को नहीं देखा गया। जानकारों के मुताबिक मौत की वजह स्पष्ट करने में इसकी अहम भूमिका होती है।

बेमन से पोस्टमार्टम
पोस्टमार्टम रिपोर्ट में फॉरेंसिक टीम की ओर से पकड़ी गई विसंगतियों की असल वजह डॉक्टरों को बेमन से ड्यूटी करना है। पोस्टमार्टम करने वाले पैनल में शामिल दोनों पुरुष डॉक्टर जिला मुख्यालय पर न रहकर बरेली से अप-डाउन करते हैं। घटना वाले दिन इन्होंने दिन में ड्यूटी की थी। शाम को वह बरेली निकलने वाले थे। शाम पांच बजे के बाद पोस्टमार्टम सामान्य रूप से होते भी नहीं हैं। ऐसे में जब रात में उन्हें अचानक पोस्टमार्टम करने का आदेश मिला तो वह झुंझला गए। डॉक्टरों ने जल्दबाजी में पोस्टमार्टम की प्रक्रिया पूरी की और रिपोर्ट तैयार करके चले गए।
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पीड़ित परिवार का हो सकता है नार्को टेस्ट

कटरा सआदतगंज कांड की हकीकत जानने में जुटी केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने अपनी तफ्तीश को नए सिरे से पीड़ित परिवार से जुड़े लोगों पर केंद्रित कर दिया है। नतीजे पर पहुंचने के लिए सीबीआई अधिकारियों ने रविवार को मंडी स्थित गेस्ट हाउस में पीड़ित पक्ष के कुछ पड़ोसियों और गांव के अन्य लोगों को बुलाकर पूछताछ की। इनमें से ज्यादातर वे लोग हैं, जो घटना की रात दोनों लड़कियों की तलाश के दौरान पीड़ित परिवार के साथ थे।

इस बीच नई दिल्ली स्थित सीबीआई सूत्रों ने बताया कि मामले की जांच-पड़ताल के दौरान किए गए वैज्ञानिक परीक्षणों की रिपोर्ट अब तक नहीं मिली है। सूत्रों ने बताया कि अभी तक लिए गए पीड़ित परिवार के बयान और परिस्थितिजन्य साक्ष्य मेल नहीं खा रहे हैं। ऐसे में जरूरत पड़ने पर पीड़ित परिवार का नार्को टेस्ट भी कराया जा सकता है। बावजूद इसके अभी लाई डिटेक्टर टेस्ट की रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है। घटनास्थल पर मिले मोबाइल की जांच भी की जा रही है।

ऑनर किलिंग की आशंका के बारे में पूछे जाने पर सूत्रों ने कहा कि पीड़ित परिवार, गवाहों और आरोपियों से पूछताछ का सिलसिला अभी चल रहा है। ऐसे में कुछ भी कहना जल्दबाजी होगी।
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