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बदायूं: पीड़ित परिवार का लाई डिटेक्टर टेस्ट

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सीबीआई उत्तर प्रदेश के बदायूं में रेप, हत्या के बाद आम के पेड़ से लटकी मिलीं दो चचेरी बहनों के पिताओं का लाई डिटेक्टर टेस्ट कराएगी क्योंकि जांच एजेंसी परिवार द्वारा दिए गए घटना के ब्योरे से संतुष्ट नहीं है।
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हालांकि एजेंसी के सूत्रों ने सफाई देते हुए कहा कि इस कदम को मृतक बहनों के परिजनों के दावों पर संदेह के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। इस मामले की कड़ियों को जोड़ने के लिए एजेंसी को उनके बयानों की सच्चाई का पता लगाने की जरूरत है।

सूत्रों का कहना है कि मृतक बहनों के पारिवारिक सदस्यों द्वारा दिए गए बयानों में विसंगतियां हैं। मामले को आगे बढ़ाने से पहले इन सब बातों को स्पष्ट कर लेना जरूरी है।
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27 मई को हुआ था बदायूं रेप कांड

उन्होंने बताया कि एजेंसी ने चार लोगों का लाई डिटेक्टर टेस्ट कराने का निर्णय निर्णय है। इन चार लोगों में दोनों नाबालिग चचेरी बहनों के पिता और दो अन्य परिवार सदस्य शामिल हैं।

सूत्रों का कहना है कि इन लोगों की सहमति पहले ही ले ली गई है और एजेंसी पॉलीग्राफ टेस्ट की प्रक्रिया शुरू करने से पहले जल्द ही अनुमति के लिए कोर्ट जाएगी। पॉलीग्राफ टेस्ट को ही लाई डिटेक्टर टेस्ट के नाम से जाना जाता है।

हालांकि टेस्ट को कोर्ट प्रमाणिक सुबूत के तौर पर नहीं मानता है लेकिन इससे एजेंसी को अपनी जांच की दिशा तय करने में मदद करता है। उत्तर प्रदेश के बदायूं में 27 मई को दो नाबालिग चचेरी बहनों को रेप और हत्या के बाद आम के पेड़ पर लटका दिया गया था।

उत्तर प्रदेश पुलिस के डीजी एएल बनर्जी ने भी घटना को लेकर सवाल उठाए थे। उन्होंने कहा था कि दोनों में से एक के साथ बलात्कार की पुष्टि नहीं हुई है। साथ ही उन्होंने अपराध के पीछे संपत्ति को वजह बताई थी।
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