राजस्थान की टोंक-सवाईमाधोपुर की चुनावी पिच पर खेलने उतरे भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान और सांसद मोहम्मद अजहरुद्दीन पर बारहवें खिलाड़ी जैसा हाल होने का खतरा मंडरा रहा है।
विज्ञापन
इस पिच पर अल्पसंख्यकों की नाराजगी की बड़ी-बड़ी दरारें हैं तो जनता के बीच यूपीए सरकार में मंत्री होने के बावजूद स्थानीय सांसद नमोनारायण मीणा के विकास न कर पाने की नाराजगी रूपी घास भी उगी हुई है।
कांग्रेस ने अजहर को अल्पसंख्यक मतदाताओं की संख्या को देखते हुए यहां के मैदान में उतारा है, लेकिन अल्पसंख्यक ही उन पर बाहरी का आरोप लगाते हुए उनके विरोध में उतर आए हैं। ऐसी नाजुक परिस्थितियों में अजहर भारी दबाव में खेलने को मजबूर हैं।
विज्ञापन
जोनापुरिया भी हैं बाहरी, लेकिन कम हो रहा विरोध
अजहर का मुकाबला करने के लिए भाजपा ने गुर्जर मतदाताओं की संख्या को देखते हुए इस समाज के सुखवीर सिंह जोनापुरिया को टिकट दिया है। दोनों प्रत्याशियों में एक सामान्य बात यह है कि दोनों ही बाहरी हैं, लेकिन जोनापुरिया का विरोध थोड़ा कम हो रहा है।
जोनापुरिया को मोदी लहर, मतदाताओं की वर्तमान सांसद से नाराजगी, गुर्जर समाज का समर्थन और इस लोकसभा क्षेत्र की सभी विधानसभा सीटें भाजपा के पास होने से लाभ मिल सकता है।
टोंक-सवाईमाधोपुर सीट पर कुल मतदाता 1694512 हैं। इनमें सबसे अधिक करीब 4 लाख मीणा समाज से हैं। इसके अलावा गुर्जर मतदाता करीब 3.25 लाख, मुस्लिम मतदाता करीब 3 लाख तथा अनुसूचित जाति के मतदाता करीब 2 लाख हैं, जो परिणाम को प्रभावित करने की ताकत रखते हैं।
पिछले चुनाव में जीते थे कांग्रेस के नमोनारायण मीणा
पिछले चुनाव में नमोनारायण मीणा ने भाजपा के गुर्जर आरक्षण आंदोलन के अगुआ रहे कर्नल किरोड़ीसिंह बैंसला को करीब 350 मतों से हराया था।
टिकट मिलने के बाद से ही एक-दो अल्पसंख्यक नेताओं को छोड़ बाकी सभी ने अजहर के साथ प्रचार करने में परहेज रखा है। वहीं, विधानसभा चुनाव में हारे कांग्रेस के केन्द्रीय मंत्री रहे अबरार अहमद के पुत्र दानिश अबरार जरूर उनका साथ दे रहे हैं।
हालांकि अजहर का कहना है कि बाहरी व्यक्ति बेहतर विकास कर सकता है और जीतने के बाद वे स्थानीय लोगों को उनके बाहरी होने का अहसास नहीं होने देंगे।
जोनापुरिया के पीछे मजबूती से खड़ी वसुंधरा
जानकारी के अनुसार हरियाणा के जोनापुरिया रियल एस्टेट कारोबारी है और भाजपा के फाइनेंसरों में से एक हैं। हालांकि रामपाल जाट सहित कुछ भाजपा नेताओं की शिकायत थी कि टिकट देने से पहले पूछा तक नहीं गया।
मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के कहने पर जोनापुरिया को टिकट दिया गया है, इस कारण राजे ने स्थानीय सभी विधायकों व भाजपा नेताओं को जोनापुरिया के समर्थन में अधिकतम मतदान करवाने के निर्देश दिए हैं। तभी से ही विरोध थम गया है।
इस सीट पर मीणा समाज सबसे बड़ा वोट बैंक है। बसपा ने मौका देखकर पूर्व विधायक सुरेश मीणा को टिकट दिया है। लेकिन पूरे मीणा समाज पर उनका प्रभाव नहीं है। इस कारण उन्हें कांग्रेस और भाजपा की टक्कर के बीच चुनौती नहीं माना जा रहा।
- सवाईमाधोपुर से जयपुर की ओर रेलवे की सिंगल लाइन हैं, जिससे एक-दूसरी ट्रेनों को निकलने के लिए रोकना या धीमा करना पड़ता है।
- टोंक शहर में रेलवे स्टेशन नहीं है। यात्रियों को ट्रेन पकडऩे के लिए निवाई कस्बे में आना पड़ता है। बजट में घोषणा के बाद भी कोई काम नहीं हुआ है।
- कोई औद्योगिक विकास नहीं है, जिससे बेरोजगारी बढ़ रही है।
मुख्य मुद्दाः गुर्जर समाज का मुख्य मुद्दा मीणा समाज की तरह अनुसूचित जनजाति के तहत मिले आरक्षण, वहीं मीणा समाज इस मांग के विरोध में है। राजनीतिक पार्टियां गुर्जरों को आश्वासन देने से इसलिए डरती है कि कहीं मीणा मतदाता नाराज न हो जाएं।