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अहमदाबाद में पूछते हैं लोग 'भारत जाना है या पाकिस्तान'

Sat, 19 Sep 2015 04:24 PM IST
टीम डिजिटल/ अमर उजाला, नई दिल्ली
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गुजरात की राजधानी अहमदाबाद में एक अजीबोगरीब मामला सामने आया है। यहां हिंदू बहुसंख्यक इलाकों को 'भारत' कहा जाता है और मुस्लिम बहुसंख्यक इलाकों को 'पाकिस्तान' कहा जाता है।
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वो सड़कें जो हिंदू और मुस्लिम क्षेत्रों को बांटती हैं उन्हें क्षेत्र के लोग 'बॉर्डर' कह कर बुलाते हैं। ये 'बॉर्डर' ऐसे क्षेत्र माने जाते हैं जहां दोनों समुदायों के लिए जगह होती है और उस पर दोनों का अधिकार होता है।

अहमदाबाद के जुहापूरा में मुस्लिम आबादी बहुसंख्यक है और इसी के पास में ही हिंदू बहुसंख्यक क्षेत्र है वेजलपुर। जुहापुरा को 'मिनी पाकिस्तान' को कहा जाता है।
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यहां वाघा बॉर्डर भी !

वेजलपुर और जुहापुरा को बांटने वाली सड़क को 'वाघा बॉर्डर' कहा जाता है। ये सारे नाम इलाके के लोगों के लिए आम है लेकिन अब हालात यहां तक आ पहुंचे हैं कि इन्हें प्रशासनिक स्वीकृति मिल रही है।

क्षेत्र के राखियल पुलिस स्टेशन ने 4 लोगों की लड़ाई के एक मामले एफआईआर दर्ज की, जिसमें बाबू अजीज भाई और फैजान अजीजभाई को वाटवा पाकिस्तान का निवासी बताया गया है।

अहमदाबाद स्थित यह छोटा पाकिस्तान एक हाउसिंग एन्क्लेव है जहां साबरमती नदी के किनारे चल रही योजना के कारण बनी झुग्गियों में रहने वाले करीब 2,500 मुस्लिम परिवारों को पुर्नस्थापित किया गया है।

खुद को बताते हैं पाकिस्तान का

आरोपियों का पता पाकिस्तान लिखने के संबंध में राखियल पुलिस स्टेशन के इंस्पेक्टर बरकत अली चावड़ा ने कहा कि जिसने एफआईआर दर्ज की उसे सिटी कंट्रोल रूम से यही जानकारी मिली। इस इलाके में यह आम बात है और वहां रहने वाले खुद को पाकिस्तान में रहने वाला ही बताते हैं।

अगर बात करे सरकारी रिकार्डों की तो अहमदाबाद नगरपालिका के रिकार्ड के अनुसार वह ब्लॉक जहां दोनों समुदायों की आबादी रहती है उसे सद्भावना नगर नाम दिया गया है।

करीब 2 साल पहले पत्थर फेंके जाने की एक घटना के बाद भारत और पाकिस्तान के बीच एक पुलिस पोस्ट की स्थापना की गई जिसका नाम सद्भावना चौकी रखा गया।
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हमें आदत हो चुकी है

स्थानीय निवासी शेख समीर के अनुसार हमें इसकी आदत है और ऑटो रिक्शा ड्राइवर भी पूछते हैं कि हमें भारत जाना है या फिर पाकिस्तान।

इस मामले पर गृह सचिव जीएस मलिक ने कहा कि 'कई बार शिकायतें उन्हीं भाषाओं में दर्ज कराई जाती है जैसा उनका चलन होता है'।

उन्होंने कहा कि इस मामले में भी शिकायतकर्ता ने अपने बयान में इसका जिक्र किया ही होगा लेकिन पुलिस को एफआईआर दर्ज करने से पहले इसकी जानकारी को जांच कर लेना चाहिए।
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