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पठानकोट और मजार-ए-शरीफ: एक साजिश का हिस्सा

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पठानकोट एयरफोर्स बेस आतंकी हमले के एक दिन बाद अफगानिस्तान के मजार-ए-शरीफ स्थित भारतीय दूतावास पर किया गया हमला पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई की एक ही साजिश का हिस्सा है।
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विदेशों में काम करने वाली भारतीय खुफिया एजेंसी रिसर्च एंड एनालिसिस विंग (रॉ) को इस बात के पुख्ता सुराग हाथ लगे हैं। उच्च पदस्थ सूत्रों के मुताबिक ये हमले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पाकिस्तान-अफगानिस्तान नीति को पटरी से उतारने की कोशिश के तहत किए गए हैं।

सूत्रों ने बताया कि 15 जनवरी को अगर दोनों देशों के विदेश सचिव स्तर की वार्ता होती है तो भारत इस मुद्दे को भी प्रमुखता से उठाएगा।
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पठानकोट का मॉड्यूल ही अफगान में शामिल

गौरतलब है कि अफगानिस्तान में भारत की मजबूत होती मौजूदगी से पाकिस्तानी सेना और आईएसआई खासी परेशान है। जैश-ए-मोहम्मद के जिस मॉड्यूल का इस्तेमाल पठानकोट हमले के लिए किया गया है वही मॉड्यूल मजार-ए-शरीफ हमले में भी शामिल है।

सूत्रों ने बताया कि लश्कर-ए-तोइबा से इतर जैश-ए-मोहम्मद की सांठगांठ अफगानिस्तान में सक्रिय तालिबान से भी है।

यही वजह है कि भारत और अमेरिका की ओर से इन हमलों पर तीखी प्रतिक्रिया के बाद आईएसआई ने यूनाइटेड जेहाद काउंसिल से हमले की जिम्मेदारी का बयान दिलवाया। ताकि इन हमलों में आईएसआई की जिम्मेदारी साबित न हो सके।
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