भाजपा ने आखिरकार मान लिया कि वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी के सम्मेलन में शामिल नहीं होंगे।
आडवाणी को मनाने में जुटे पार्टी अध्यक्ष राजनाथ सिंह को उन्होंने सम्मलेन के लिए बधाई तो दी पर ‘बीमारी’ के चलते हिस्सा लेने में असमर्थता जता दी।
जनसंघ से लेकर भाजपा के इतिहास में यह पहला मौका है जब पार्टी की कार्यकारिणी की बैठक में न तो अटल बिहारी वाजपेयी हैं और न आडवाणी।
वाजपेयी के अस्वस्थ हो जाने के बाद आडवाणी ही भाजपा के सम्मेलनों में संरक्षक भी भूमिका निभाते रहे हैं।
इससे माना जा रहा है कि अब अटल-आडवाणी के युग का अंत हो चुका है।
आडवाणी को मनाने की लगातार कोशिशें होती रहीं। राजनाथ के अलावा खुद सुषमा स्वराज ने भी उनसे बात की, लेकिन आडवाणी नहीं माने।
आडवाणी के इस सम्मेलन में शामिल नहीं होने को लेकर भाजपा को लगातार सफाई देनी पड़ रही है।
सम्मेलन का उद्घाटन करते समय ही राजनाथ ने प्रतिनिधियों को बता दिया कि अब आडवाणी नहीं आएंगे।
राजनाथ ने फिर दावा किया कि उन्होंने ही आडवाणी को स्वास्थ्य लाभ के लिए आराम करने की सलाह दी है।
बाद में पार्टी प्रवक्ता प्रकाश जावडेकर ने भी कहा कि आडवाणी सच में बीमार हैं, हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि कोई गंभीर बीमारी नहीं है।
जावडेकर ने आधिकारिक तौर पर कह दिया कि आडवाणी कार्यकारिणी की बैठक में शामिल नहीं होंगे।
इधर, आडवाणी की तरह ‘बीमार’ नेताओं की सूची लगातार लंबी होने से भी भाजपा चिंतित दिखी।
जसवंत सिंह, उमा भारती, शत्रुघ्न सिन्हा के बाद अब भगत सिंह कोश्यारी, बीसी खंडूरी, मेनका गांधी भी बैठक से दूर हैं।
बहरहाल, आडवाणी की अनुपस्थित के चलते अब सम्मेलन का समापन भी राजनाथ ही करेंगे। अब तक हर सम्मेलन का समापन आडवाणी करते रहे थे।