जयपुर साहित्य उत्सव के दौरान विवादित बयान देने वाले समाजशास्त्री आशीष नंदी ने गिरफ्तारी से बचने के लिए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। कोर्ट इस पर शुक्रवार को सुनवाई करेगा।
नंदी ने कहा है कि उनके खिलाफ दर्ज सभी एफआईआर खारिज कर दी जाएं। उनका कहना है कि एफआईआर में अपराध का जिक्र नहीं है। मेरी सफाई को ध्यान में रखे बिना मेरे खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है।
मालूम हो कि जयपुर के अशोक नगर थाने में आशीष नंदी और फेस्टिवल के आयोजक संजय रॉय के खिलाफ एससी, एसटी एक्ट के तहत एफआईआर दर्ज की गई थी। इन पर गैर जमानती धाराएं लगाई गई है। इसके अलावा कई और शहरों में भी नंदी के खिलाफ एफआईआर दर्ज करवाई गई है।
अगर नंदी दोषी पाए जाते हैं तो उनको 10 साल तक की सजा हो सकती है। जयपुर पुलिस की टीम नंदी से पूछताछ के लिए दिल्ली में हैं। जयपुर के डिप्टी कमिश्नर प्रहलाद कृष्नैया के नेतृत्व में दिल्ली पहुंची टीम नंदी का बयान दर्ज करेगी।
कृष्नैया का कहना है कि वे यह समझने की कोशिश करेंगे कि नंदी ने किस संदर्भ में बयान दिया है। इससे पहले जयपुर पुलिस ने नंदी को पूछताछ के लिए जयपुर आने को कहा था। इसके लिए उनको समन भी भेजा गया था लेकिन नंदी ने कहा था कि उन्हें कोई समन नहीं मिला है।
नंदी ने मंगलवार को कहा था कि वह अपने बयान पर कायम हैं। उनका कहना था कि मैंने 45 साल तक दलितों और आदिवासियों के लिए काम किया है और इसके बावजूद अगर 75 साल की उम्र में मुझ पर ऐसा आरोप लगता है तो मैं जेल जाने के लिए तैयार हूं। मालूम हो कि जयपुर में एक साहित्य समारोह के दौरान पिछले दिनों नंदी ने कहा था कि अनुसूचित जातियों और पिछड़ा वर्गों के लोगों में अधिक भ्रष्टाचार है।
इस बयान के तूल पकड़ने के बाद साहित्य महोत्सव विवादों के घेरे में आ गया और नंदी की मुश्किलें लगातार बढ़ती गई। अनेक दलित और जनजाति संगठन नंदी की गिरफ्तारी की मांग करने लगे हैं। इसी के चलते नंदी ने अपनी गिरफ्तारी से बचने के लिए शीर्ष अदालत का दरवाजा खटखटाया है।