नेताओं और उनके परिजनों के बाद बुधवार को इंडिया अगेंस्ट करप्शन के लीडर अरविंद केजरीवाल ने देश के सबसे बड़े कारपोरेट घराने रिलायंस को अपनी व्यूह रचना में घेर लिया। उन्होंने देश की महत्वाकांक्षी कृष्णा-गोदावरी बेसिन से प्राकृतिक गैस निकालने की परियोजना को रिलायंस द्वारा ‘दादागिरी और भ्रष्टाचार’ से चलाने और सरकार द्वारा इस ‘चक्रव्यूह’ में घुटने टेकने के आरोप लगाए। केजरीवाल ने कहा कि सरकार ने रिलायंस की खुशी और उसे लाभ पहुंचाने के लिए अपने ईमानदार पेट्रोलियम मंत्रियों को पद से हटाया। उन्होंने यह भी सवाल किया कि क्या कांग्रेस रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड (आरआईएल) के प्रमुख मुकेश अंबानी की दुकान है?
केजरीवाल ने आरआईएल को कृष्णा-गोदावरी बेसिन में प्राकृतिक गैस निकालने के लिए मिले ठेके को कारपोरेट-राजनीति का अवैध गठजोड़ बताया। वह बुधवार को राजधानी स्थित कांस्टीट्यूशन क्लब में मीडिया से रूबरू थे। उन्होंने आरोप लगाया कि केजी बेसिन में आरआईएल वर्ष 2001 से मनमानी करती आ रही है।
2004 में आरआईएल ने एनटीपीसी से समझौता किया था कि कंपनी 17 वर्षों तक 2.34 डॉलर प्रति यूनिट की दर से गैस सप्लाई करेगी, लेकिन 2007 में आरआईएल ने यह दर 4.25 करने की मांग की। तब सरकार ने तत्कालीन वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी की अध्यक्षता में मंत्रियों के एक समूह का गठन किया, जिसने रिलायंस की मांग मान ली।
इससे सरकारी खजाने को आठ हजार करोड़ रुपये का नुकसान हुआ। अब आरआईएल 2010 से दबाव बना रही है कि यह दर 14.2 डॉलर प्रति यूनिट की जाए। सरकार इसे स्वीकार कर लेती है तो देशवासियों को बिजली की कीमत 7 रुपये यूनिट चुकानी होगी, जबकि खाद के दाम तीन गुना तक बढ़ जाएंगे।
केजरीवाल ने आरोप लगाया कि आरआईएल गैस उत्पादन में भी कालाबाजारी कर रही है। 31 गैस कुओं की जगह अभी तक सिर्फ 13 कुओं से गैस का उत्पादन हो रहा है। कंपनी गैस की कीमतें बढ़ने तक इंतजार कर रही है। कम उत्पादन से खफा होकर तत्कालीन पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री जयपाल रेड्डी ने कंपनी को नोटिस भी भेजा था।
साथ ही, उन्होंने सरकार को बताया था कि अगर आरआईएल की बात मानी जाती है तो सरकार को 45,000 करोड़ रुपये का नुकसान होगा। प्रधानमंत्री पर आरोप लगाते हुए केजरीवाल ने कहा कि उन्होंने मंत्री की जगह रिलायंस की बात सुनी और मामला अटार्नी जनरल की राय के लिए भेज दिया। रेड्डी की मंत्रालय से छुट्टी कर दी गई। इससे पहले मणिशंकर अय्यर को भी रिलायंस के विरोध की कीमत चुकानी पड़ी थी। उनकी जगह पर मंत्रालय संभालने आए मुरली देवड़ा ने मुकेश अंबानी की कंपनी को एक लाख करोड़ का फायदा पहुंचाया था।
केजरीवाल ने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री को कांग्रेस ने फंसा रखा है, वे बेबस हैं। रिलायंस की मनमानी से आज हजारों मेगावाट के गैस पावर प्लांट बंद पड़े हैं। कंपनी अपने गैस कारोबार का सीएजी से ऑडिट करने को तैयार नहीं है। जनता का आह्वान करते हुए केजरीवाल ने कहा कि आम लोगों को अगर सस्ती बिजली व गैस चाहिए, महंगाई से निजात चाहिए तो विद्रोह पर उतरना होगा। उन्होंने मांग की कि केजी बेसिन का ठेका रद्द करने के साथ ही रिलायंस का सीएजी से ऑडिट करवाया जाए।
रिलायंस पर आरोप
1 - 2004 में रिलायंस द्वारा एनटीपीसी को 2017 तक 2.25 डॉलर प्रति यूनिट की दर से गैस आपूर्ति का समझौता। रिलायंस की मांग पर दो साल बाद कीमत बढ़ा कर 4.25 डॉलर प्रति यूनिट। अब रिलायंस इसकी कीमत बढ़ा कर 14.25 डॉलर प्रति यूनिट मांग रहा है।
- मायने : रिलायंस द्वारा कीमत बढ़ाने से पहले ही बिजली महंगी हो गई है। यदि नई मांग मान ली गई तो तीन रुपये प्रति यूनिट मिल रही बिजली सात रुपये प्रति यूनिट हो जाएगी। रिलायंस को 43 हजार करोड़ रुपये का अनावश्यक लाभ होगा।
2 - 2007 में तत्कालीन केंद्रीय वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी की अध्यक्षता में अधिकार प्राप्त मंत्रियों के समूह ने रिलायंस के दबाव के आगे झुकते हुए 2014 तक 4.25 डॉलर प्रति यूनिट हिसाब से करने की अनुमति दे दी।
- मायने : सरकारी खजाने को आठ हजार करोड़ का नुकसान हुआ। रिलायंस को हुआ 45 हजार करोड़ रुपये का फायदा।
3 - रिलायंस को सरकार को 8 हजार करोड़ यूनिट गैस देनी थी लेकिन उसने दी महज दो हजार करोड़ यूनिट। जानबूझकर गैस उत्पादन घटाया। उसने 2009 से गैस का उत्पादन तय सीमा से एक तिहाई कर दिया। रिलायंस की जिद है कि गैस एनटीपीसी को तभी मिलेगी जब इसकी कीमत 14.25 डॉलर प्रति यूनिट हो जाएगी।
- मायने : गैस आधारित कई बिजलीघरों को बंद करना पड़ेगा। जबकि बिजली की कमी से कई पहले ही बंद होने के कगार पर हैं। महंगी बिजली से उद्योगों की रफ्तार धीमी पड़ेगी। महंगाई बढ़ेगी।
4 -आज रिलायंस के 31 में से केवल 13 कुएं ही काम कर रहे हैं।
- मायने : रिलायंस गैस की जमाखोरी कर रहा है। ताकि जब सरकार दाम बढ़ा दे तब वो उसे बेचे और फायदा कमाए।
5- रिलायंस ने जुलाई 2011 में केजी बेसिन ठेके का 30 प्रतिशत हिस्सा ब्रिटिश पेट्रोलियम को 35 हजार करोड़ रुपये में बेच दिया।
- मायने : सरकार ने सवाल नहीं उठाए और चुपचाप देखती रही।
6 - मणिशंकर अय्यर और जयपाल रेड्डी जैसे रिलायंस की मनमानियां न मानने वाले मंत्रियों को समय समय पर पेट्रोल मंत्रालय से हटाया गया। वीरप्पा मोइली को इसलिए पेट्रोलियम मंत्री बनाया गया है ताकि रिलायंस को 45 हजार करोड़ रुपये का फायदा पहुंचाया जा सके।
- मायने : रिलायंस की मांगें और मनमानी बढ़ती गई। अय्यर की जगह देवड़ा आए और रेड्डी की जगह मोइली। देवड़ा के पेट्रोलियम मंत्री रहते हुए मुकेश अंबानी की कंपनी को एक लाख करोड़ का फायदा हुआ। ताजा आरोपों के बाद सबकी नजरें इस मामले पर रहेगी।
‘मनमोहन नहीं, मुकेश अंबानी देश चला रहे’
केजरीवाल ने प्रेस कांफ्रेंस कहा कि हमारे प्रधानमंत्री का दिल गरीबों के लिए नहीं बल्कि मुकेश अंबानी के लिए धड़कता है। रिलायंस लगातार मनमानी और दादागिरी कर रहा है। ऐसा लगता है कि मनमोहन सिंह नहीं, बल्कि मुकेश अंबानी देश चला रहे हैं। आज रिलायंस इंड्रस्ट्रीज लिमिटेड और सरकार की मिलीभगत के कारण ही गैस के दाम बेतहाशा बढ़ गए हैं।
केजरीवाल ने आरोप लगाते हुए सत्ता-विपक्ष और कारपोरेट के गठजोड़ में किसी को नहीं बख्शा।
उन्होंने कहा कि भाजपा नीत राजग सरकार ने केजी बेसिन का ठेका रिलायंस को देते हुए इस तरह का करार किया कि रिलायंस को सीधे तौर पर फायदा पहुंचता रहे। भाजपा ने समझौता किया, कांग्रेस ने उस पर अमल किया। उन्होंने सवाल उठाया कि 2001 से जब रिलांयस मनमानी कर रहा है और गैस को कम कीमत पर बेचने से उसने इंकार किया तो सरकार ने उसका कॉन्ट्रेक्ट रद्द क्यों नहीं किया? रिलांयस से यह ठेका वापस लेना चाहिए ताकि देश को अधिक से अधिक गैस कम कीमत में मिल सके।
एक और दामाद...
सोनिया गांधी के दामाद रॉबर्ट वाड्रा पर पिछले दिनों निशाना साधने के बाद केजरीवाल पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के दामाद रंजन भट्टाचार्य को भी सुर्खियों में ले आए। संवाददाता सम्मेलन में उन्होंने सबसे पहले नीरा राडिया और भट्टाचार्य की बातचीत के दो ऑडियो टेप सुनाए। जिसमें भट्टचार्य राडिया को यह कहते सुने गए कि मुकेश अंबानी ने उनसे कहा है ‘कांग्रेस तो अब अपनी दुकान है।’
प्रतिक्रियाएं
केजरीवाल की टीम आरोप लगाने वाली मासिक मंडी और साप्ताहिक बाजार बनकर रह गई है। उसकी मानसिकता हिट एंड रन (वार करो और फरार हो जाओ) वाली है।
- मुख्तार अब्बास नकवी, भाजपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष
- मैं केजरीवाल को मसीहा तो नहीं मानता, लेकिन यह यह जरूर मानता हूं कि रेड्डी अच्छा काम कर रहे थे। अगर वह अपने काम को आगे बढ़ाते तो मैं उनके साथ जरूर खड़ा होता।
-मणिशंकर अय्यर, पूर्व पेट्रोलियम मंत्री
- मैं केजरीवाल द्वारा जड़े आरोपों पर कुछ नहीं कहूंगा। मेरे पास और कई जरूरी काम हैं करने के लिए।
-वीरप्पा मोइली, पेट्रोलियम मंत्री
रिलायंस ने कहा गैर जिम्मेदाराना आरोप
मुंबई। रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड ने इंडिया अगेंस्ट करप्शन द्वारा लगाए आरोपों को बेहद गैर जिम्मेदाराना और पूरी तरह बेबुनियाद बताया है। रात को मीडिया में जारी एक वक्तव्य में कंपनी ने कहा कि आरोपों में कोई सच्चाई नहीं है। केजी बेसिन देश के लिए बेहद जरूरी प्रोजेक्ट है।
इसमें हम सर्वश्रेष्ठ तकनीकी क्षमता का इस्तेमाल कर रहे है। इस प्रोजेक्ट पर देश गर्व कर सकता है। आईएसी को इस परियोजना की जटिलताओं की समझ नहीं है, ऐसे में उस पर कुछ कहना बेकार है। कुछ निहित स्वार्थी तथ्वों के इशारे पर ऐसे आरोप लगाए जा रहे हैं।