अरूणा शानबाग ने मुंबई के केईएम अस्पताल में आज सुबह 8.30 बजे अपनी आखिरी सांस ली लेकिन उनकी मौत के बाद उनके शरीर पर हक को लेकर विवाद बढ़ गया है। मीडिया को दिए बयान में केईएम हॉस्पिटल के डीन अविनाश सुपे के इस बयान के बाद कि अरूणा का शरीर उनके घर वालों को सौंपा जाएगा, अरूणा का ध्यान रख रही नर्सों में खलबली मच गई।
42 साल से अरूणा का ध्यान रख रही नर्सों में से एक कल्पना ने बीबीसी को बताया, "आप कैसे उसको घरवालों को दे सकते हो? वो 42 साल से उसकी सुध लेने नहीं आए और आज मौत के बाद वो उनकी हो गई?" नर्सों ने अस्पताल प्रशासन के इस निर्णय का विरोध करना शुरू कर दिया और वो अस्पताल से बाहर आ गईं।