रामायण और रामलीला आज भी प्रासंगिक हैं। रामलीला पारिवारिक एकता को बनाए रखकर संदेश देती है कि दुख और विपरीत परिस्थितियों में भी अपने धर्म रूपी पथ से भटकना नहीं चाहिए। यह कहना है जनमानस में श्रीराम के रूप में बसे हुए अरुण गोविल का।
गोविल ने बताया कि देश में रामायण के प्रति लोगों की रुचि जगाने के लिए जल्द ही उनकी देशभर में लाइव स्टेज कार्यक्रम करने की योजना है। इसमें भगवान राम के आदर्श को बताते हुए व रामायण की प्रासंगिकता की चर्चा कर समाज में परिवर्तन लाने की कोशिश होगी।
तस्वीरों में: आए नवरात्रि माता के...
इससे पहले 11 अक्तूबर को फरीदाबाद में एक धार्मिक कार्यक्रम में भगवान राम के आदर्श को आत्मसात करने पर बल दिया जाएगा। कोशिश सामाजिक और पारिवारिक मूल्यों की स्थापना करना है।
बकौल गोविल, जीवन में उतार-चढ़ाव आते रहते हैं, लेकिन हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि भगवान राम ने जीवन में कष्टों को सहते हुए धर्म की रक्षा की। आज समाज में सबका सम्मान कम हुआ है, जबकि ऐसा नहीं होना चाहिए।
रामलीला सबका सम्मान करने का संदेश देती है। अगर रामायण को लोग अपने जीवन में दस फीसदी भी उतार लें तो उनका जीवन धन्य हो जाएगा। रामलीला केवल मनोरंजन का साधन नहीं है। यह हमें नेक काम करने की शिक्षा देती है।
इसे देखने के बाद जीवन पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता है। रामायण में राम की भूमिका निभाने के बाद भी भगवान से हमेशा प्रार्थना करता हूं कि उनकी कृपा हम पर हमेशा बनी रहे। आखिरी सांस तक भगवान के आदर्श को जन-जन तक पहुंचाता रहूं।
मुझसे ऐसे कई लोग मिले हैं, जिनका हृदय परिवर्तन रामायण से हुआ है। अब वे जीवन में सफलता की राह पर हैं। रामलीला मंचन के दौरान वहां पहुंचकर भगवान राम का संदेश हर साल देता हूं।