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केजरीवाल पर 'शांति भूषण के लेख' से बवाल

Fri, 13 Dec 2013 10:33 PM IST
अमर उजाला, दिल्ली
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दिल्ली विधानसभा चुनावों में धमाकेदार प्रदर्शन करने वाले अरविंद केजरीवाल और आम आदमी पार्टी पर छपे एक लेख ने बवाल मचा दिया है।
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एक अंग्रेजी अखबार में आप के संस्थापक सदस्य शांति भूषण के नाम और तस्वीर के साथ छपे इस आलेख में केजरीवाल को निशाने पर लेकर कई गंभीर बातें कही गई हैं।

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हालांकि, शांति भूषण का कहना है कि यह लेख उन्होंने नहीं लिखा है। उन्होंने अखबार के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करने की बात कही है।

लेख में केजरीवाल पर निशाना
यह लेख अपने आप में बवाल का काफी सामान बटोरे है। इसमें कहा गया है, "केजरीवाल ने बड़ी चतुराई से भाजपा को निशाने पर लेते हुए भ्रष्टाचार का मामला उठाया। उन्होंने एक तरफ भाजपा और कांग्रेस को एक पलड़े पर रखा और दूसरी ओर, मुस्लिमों का समर्थन हासिल करने में जुट गए।"

लेख में कहा गया है कि अन्ना के लोकपाल आंदोलन की शुरुआत कांग्रेस विरोध के रूप में हुई थी। लेकिन बाद में केजरीवाल ने भाजपा का नाम इसलिए उछाला ताकि एक समुदाय विशेष का समर्थन हासिल कर सकें। इसमें लिखा है, "वरना भाजपा सत्ता से दूर थी, ऐसे में उसके भ्रष्टाचार में शामिल होने की बात समझ नहीं आती।"
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'जानकर भाजपा को निशाने पर लिया'
इसमें आगे लिखा है, "भाजपा ने आप की ताकत को नजरअंदाज किया और केजरीवाल ने इसका पूरा फायदा उठाया। वह चुपचाप भाजपा के खिलाफ काम कर रहे थे और कांग्रेस के प्रति विरोध दिखा रहे थे। उन्होंने लोगों की भावनाओं को फायदा उठाया और चुनावों में बढ़िया प्रदर्शन किया। उन्होंने चतुराई से भ्रष्टाचार का ठीकरा कांग्रेस के साथ भाजपा के सिर भी फोड़ दिया।"

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लेख में आगे कहा गया है कि उन्होंने ऐसा जानबूझकर किया ताकि अल्पसंख्यकों को रिझाया जा सके...। नरेंद्र मोदी इसलिए लोगों की पसंद बने हैं, क्योंकि उन्होंने समस्याओं को सुलझाने और देश का गौरव लौटाने की हिम्मत और समझदारी दिखाई है। केजरीवाल मोटे तौर पर गवर्नेंस को लेकर नजरअंदाजाना रुख अपनाए हैं।

'राजनीतिक तंत्र अस्थिर करना चाहते हैं केजरीवाल'
लेख में कहा गया है, "ऐसा मालूम देता है कि केजरीवाल की प्राथमिकता देश के राजनीतिक सिस्टम को अस्थिर बनाना है, जो अभी तक स्थिर है और जिसमें बदलाव की कोई जरूरत नहीं है। इसके लिए वह राजनीतिक दलों की विश्वसनीयता खत्म करना चाहते है। खास तौर से भाजपा और मोदी को रोकना चाहते हैं, इस बारे में सोचे बगैर कि इसके नतीजे क्या होंगे।"
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इसमें लिखा गया है, "क्योंकि वह जानते हैं कि एक बार अगर मोदी सत्ता में आ गए, तो उनकी दुकान सिमट जाएगी। उनके ख्वाब चकनाचूर हो जाएंगे और जो विचार हैं, उन्हें भारी नुकसान पहुंचेगा।"
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