पोंटी चड्ढा के लाइसेंस को लेकर मुरादाबाद प्रशासन ने उत्तर प्रदेश शासन से एक बड़ा झूठ बोला था। रिवाल्वर का लाइसेंस मुरादाबाद से जारी हुआ लेकिन कह दिया गया कि यहां से कोई लाइसेंस नहीं बना। इस मामले में लखनऊ से अफसरों पर डांट पड़ी। बौखलाए अफसरों ने भी गलत रिपोर्ट देने वालों पर कार्रवाई शुरू कर दी है। शुक्रवार को सिटी मजिस्ट्रेट ने असलाह क्लर्क को हटा दिया है।
मुरादाबाद और रामपुर प्रशासन ने चड्ढा परिवार को दिल खोलकर लाइसेंस बांटे थे। हफ्तों में लगने वाली रिपोर्ट एक दिन में कंप्लीट कर ली गई और लाइसेंस बन गए। रामपुर से ही सात लाइसेंस जारी हुए। अमर उजाला ने सबसे पहले इसका खुलासा किया था। जब यह खबरें सुर्खियां बनी तो शासन तक हड़कंप मचा। लखनऊ से रिपोर्ट मांग ली गई।
प्रशासन ने जो रिपोर्ट दी, उसमें कहा गया कि मुरादाबाद से पोंटी चड्ढा को कोई लाइसेंस जारी नहीं किया गया है। लेकिन जब फाइलों को खंगाला गया तो पता चला 1983 में पोंटी चड्ढा को रिवाल्वर का लाइसेंस दिया गया था। 1993 में पोंटी ने अपना यह लाइसेंस दिल्ली के पते पर ट्रांसफर करा लिया था।