सड़कें बनाना और उसकेबाद समय-समय पर विभिन्न सरकारी एजेंसियों द्वारा विकास कार्य केनाम पर सड़क की खुदाई और फिर उसका पुनर्निर्माण। यह कहानी सिर्फ किसी एक शहर तक ही सीमित नहीं है बल्कि पूरे देश में यही हाल है।
सरकारी एजेंसियों में आपस में तालमेल नहीं होने के कारण सरकारी खजाने को भारी नुकसान हो रहा है। सुप्रीम कोर्ट में इस मसले को लेकर एक जनहित याचिका दाखिल की गई है। याचिका पर सोमवार को सुनवाई होगी।रोशन चपागेन द्वारा दाखिल इस याचिका में कहा गया है कि विकास कार्य केनाम पर सरकारी एजेंसी बनाती कम हैं और बिगाड़ती ज्यादा हैं।
सड़कें बनाई जाती है लेकिन कभी पीएनजी पाइपलाइन केनाम पर तो कभी ऑप्टिकल फाइबर लाइन बिछाने या मरम्मत केनाम पर, कभी पानी की पाइप लाइन बिछाने या मरम्मत के नाम पर सड़कें तोड़ी जाती हैं। एक सरकारी एजेंसी का काम खत्म होता है तो दूसरी एजेंसी अपना काम शुरू कर देती है।