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एपीएल वर्ग को राशन की दुकानों से ही मिलेगी खाद्य सामग्री

Fri, 08 Feb 2013 01:09 AM IST
नई दिल्ली/पीयूष पांडेय
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राशन की दुकानों से खाद्य सामग्री लेने वाले गरीबी रेखा के ऊपर (एपीएल) के लोगों को केंद्र सरकार ने बड़ी राहत प्रदान की है। सुप्रीम कोर्ट में सरकार ने जस्टिस वाधवा समिति के उस सुझाव को नकार दिया है जिसमें कहा गया था कि एपीएल वर्ग के लोगों को राशन की दुकानों से अनाज नहीं दिया जाना चाहिए। साथ ही सरकार ने राशनिंग की व्यवस्था में बदलाव करने की सिफारिश को भी सिरे से खारिज कर दिया है।
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केंद्र का कहना है कि खाद्य सुरक्षा बिल संसद में लंबित है। इसमें एपीएल सहित सार्वजनिक वितरण प्रणाली से जुड़े तमाम अहम मसलों का हल निकाला जाएगा। उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय ने सुप्रीम कोर्ट में दायर हलफनामे में कहा है कि चार अंकीय नंबर 1967 इस समय 16 राज्यों में काम कर रहा है। 1800 की सीरीज में यह नंबर अब पूरे देश में शुरू किया जाएगा। सभी राज्यों को इस संबंध में निर्देश जारी कर दिए गए हैं। इन नंबरों के जरिए उपभोक्ता राशन की दुकानों से अनाज न मिलने की शिकायत दर्ज करा सकेंगे।
 
सरकार ने जस्टिस वाधवा समिति की ज्यादातर सिफारिशों से सहमति व्यक्त की है। संभवत: मार्च तक पूरे होने वाले पहले चरण में पीडीएस का संपूर्ण डाटा तैयार किया जाएगा। राशन व्यवस्था से भ्रष्टाचार दूर करने के लिए 884 करोड़ की राशि से पीडीएस का कंप्यूटरीकरण किया जाएगा। जबकि दूसरे चरण में एक पोर्टल तैयार किया जाएगा। इस चरण के लिए अक्तूबर 2013 तक की समयसीमा तय की गई है।
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आंध्र प्रदेश, छत्तीसगढ़, असम और दिल्ली के कुछ जिलों में यह परियोजना प्रयोग के रूप में शुरू की गई है। अभी तक 22 राज्य केंद्र को इस संबंध में वित्तीय प्रस्ताव भेज चुके हैं। हलफनामे में कहा गया है कि गरीबी रेखा से नीचे (बीपीएल) परिवारों की गणना के लिए 29 राज्यों के 254 गांवों में पायलट प्रोजेक्ट के तहत काम चल रहा है। ग्रामीण विकास मंत्रालय राज्य सरकारों के सहयोग से इस काम को अंजाम दे रहा है। एनसी सक्सेना की अध्यक्षता में गठित विशेषज्ञ समूह ने 21 अगस्त, 2009  को बीपीएल परिवारों का पता लगाने के लिए रिपोर्ट दी थी।

इस रिपोर्ट के आधार पर एक प्रश्नावली के जरिए बीपीएल परिवारों का चयन किया जा रहा है। शहरी गरीबों की पहचान के लिए प्रोफेसर एसआर हाशिम की अध्यक्षता में एक समूह गठित किया गया है। समूह की रिपोर्ट आने पर शहरी गरीबों की पहचान का काम शुरू किया जाएगा। खाद्य भंडारण की समस्या से निपटने के लिए प्लास्टिक के तिरपाल का इस्तेमाल बढ़ाया जा रहा है। एक जून, 2012 तक 823 लाख मीट्रिक टन अनाज की खरीदारी सेंट्रल पूल के जरिए की जा चुकी है। तिरपाल से अनाज की बोरियों को ढकने की व्यवस्था सभी विकसित देशों में है।
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