आते ही छा जाना। यह जुमला उन्नाव से कांग्रेस की सांसद अनु टंडन पर एकदम सटीक बैठता है। कांग्रेस में एमपी तो दूर एमएलए का टिकट या संगठन में अदना सा पद पाने के लिए जहां बड़े-बड़े नेताओं को वर्षों एड़ियां घिसनी पड़ती हैं वहीं अनु टंडन ने महज चार-पांच साल में उन्नाव से एमपी का चुनाव जीतकर राहुल गांधी की कोर टीम में जगह हासिल कर ली।
आज वह राहुल गांधी के उस कोर ग्रुप की अहम सदस्य हैं जो पार्टी की दिशा और कार्यक्रमों का निर्धारण करती हैं। अब केजरीवाल के आरोप से वह एक बार फिर चर्चा में आ गई हैं। यूं तो अनु टंडन की पहचान एक बड़े औद्योगिक घरानों से जुड़ी ‘सोशलाइट’ की है लेकिन कांग्रेस नेता के रूप में भी उनकी पहचान बन गई है।
संगठनात्मक गतिविधियों व कार्यक्रमों में सक्रियता के चलते प्रदेश कांग्रेस में उनका ठीक-ठाक दबदबा है। जब वह कांग्रेस में शामिल हुईं थीं रिलायंस से जुड़ाव की वजह से सुर्खियों में रही थीं। 2009 के चुनाव में अपने प्रचार के लिए जब वह सलमान खान को उन्नाव ले आईं तो पूरे देश में इसकी चर्चा हुई। स्विस बैंक में मोटी रकम रखने के अरविंद केजरीवाल के आरोप के बाद वह फिर सुर्खियों में हैं।
अनु टंडन की कांग्रेस में ज्वाइनिंग 2006 में हुई थी। तत्कालीन प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष सलमान खुर्शीद ने उन्हें पार्टी की सदस्यता ग्रहण कराई थी। इसके बाद ही उन्हें प्रदेश कांग्रेस कमेटी में राहत एवं पुनर्वास प्रकोष्ठ की जिम्मेदारी भी दे दी गई। महज एक-डेढ़ वर्ष में ही उन्होंने पार्टी पर मजबूत पकड़ बना ली। इसके बाद उन्हें प्रदेश कांग्रेस मीडिया विभाग की कमान सौंप दी गई।
इसी दौरान उन्हें उन्नाव से कांग्रेस का टिकट मिला और 2009 के चुनाव में वह जीतकर लोकसभा पहुंच गईं। पार्टी नेताओं की मानें तो ‘दिल्ली दरबार’ में अनु टंडन का सिक्का चलता है। चूंकि उनका शुमार 10, जनपथ और राहुल गांधी की ‘गुडबुक’ में शामिल नेताओं में है। इसलिए केजरीवाल के आरोपों के बाद कांग्रेस उनके खिलाफ कोई कदम उठाएगी, इसकी संभावना न के बराबर है।