पांच भारतीय सैनिकों की निर्मम हत्या के मामले पर पाकिस्तानी सत्ता प्रतिष्ठान को बचाने वाले रक्षामंत्री एके एंटनी के संसद में दिए गए विवादास्पद बयान में फेरबदल सरकार के शीर्ष स्तर पर किया गया।
सरकार और नौकरशाही के उच्च स्तर पर बयान में किए गए बदलाव की जानकारी की सूचना नीचे नहीं पहुंचाने में हुई चूक के कारण एंटनी ही नहीं पूरी सरकार इस मामले में घिर गई है।
दरअसल चूक यह हो गई कि बयान में फेरबदल की जानकारी सेना और रक्षा मंत्रालय के उस स्तर तक वापस नहीं पहुंच सकी, जहां से यह बयान जारी किया गया था।
मंगलवार को एंटनी के संसद में बदला हुआ बयान पढ़ते ही रक्षा मंत्रालय के प्रेस सूचना ब्यूरो (पीआईबी) ने पुराना बयान ही मीडिया को जारी कर दिया।
संसद से सड़क तक बयान के बवंडर में घिरी सरकार के ही उच्च पदस्थ सूत्रों ने बताया कि दरअसल राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार ने रक्षा सचिव के साथ संसद में एंटनी के बयान से पहले इस मामले पर चर्चा की।
समझा जाता है कि इसी दरम्यान एंटनी के बयान में फेरबदल को अंजाम दिया गया। गौरतलब है कि राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार सीधे प्रधानमंत्री को रिपोर्ट करते हैं।
मिलिट्री ऑपरेशन महानिदेशक (डीजीएमओ) के तय किए हुए पुराने बयान में यह लिखा गया था कि गश्त लगा रहे भारतीय सेना के जवान पर हमला करने वाले बीस की टुकड़ी में पाकिस्तानी सेना के साथ आतंकवादी शामिल थे।
लेकिन संसद में एंटनी ने बयान दिया कि हमले में 20 आतंकवादी शामिल थे, जिनमें से कुछ ने पाकिस्तानी सेना की वर्दी पहन रखी थी।
सूत्रों के मुताबिक भारत और पाकिस्तान के अच्छे संबंधों के बन रहे माहौल और अगले महीने न्यूयॉर्क में पाक प्रधानमंत्री नवाज शरीफ और प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की संभावित मुलाकात के मद्देनजर सरकार पाक की नव निर्वाचित सरकार को सीधे कठघरे में खड़ा करने के पक्ष में नहीं है।
सूत्रों ने बताया कि इस हमले में घायल मराठा लाइट इंफेंट्री का जवान शांभा जी कूटे पूरी घटना का एक मात्र चश्मदीद गवाह है। उससे पूछताछ के बाद ही हमले से संबंधित कई अहम बातें सामने आएंगी।
सूत्रों के मुताबिक अफसरशाही के उच्च स्तर पर यह फैसला लिया गया कि शांभा से पूछताछ से पहले पाक सरकार पर सीधे दोष मढ़ने से फिलहाल बचा जाए। लेकिन विपक्ष ने बयानों के इस फर्क को तूल देकर सरकार को बचाव की मुद्रा में ला खड़ा किया है।