रक्षा मंत्री एके एंटनी ने लद्दाख के दौलत बेग ओल्दी (डीबीओ) में चीनी सेना के अतिक्रमण के लिए बीजिंग को जिम्मेदार ठहराया। साथ ही उन्होंने कहा कि भारत अपने हितों की रक्षा के लिए हर मुमकिन कदम उठाएगा।
हालांकि उन्होंने विश्वास जताया कि चीनी घुसपैठ के मामले का हल वार्ता के जरिए शांतिपूर्ण तरीके से निकाल लिया जाएगा। रक्षा मंत्री ने मंगलवार को चीनी घुसपैठ के मामले का समाधान निकालने के तौर तरीकों पर शीर्ष सैन्य अधिकारियों के साथ चर्चा की।
सैन्य कमांडरों की बैठक को संबोधित करते हुए रक्षा मंत्री ने कहा कि लद्दाख में उत्पन्न स्थिति हमारे द्वारा निर्मित नहीं है। पिछले दो हफ्ते से कैंप जमाए बैठे चीनी सैनिकों की समस्या हमारे द्वारा उत्पन्न नहीं है। हालांकि हम इसका शांतिपूर्ण ढंग से समाधान चाहते हैं।
लेकिन इसके साथ ही मैं जोर देकर कहना चाहूंगा कि इसमें कोई संदेह नहीं होना चाहिए कि देश हमारे हितों की रक्षा के लिए हर स्तर पर हर संभव कदम उठाने को लेकर पूरी तरह से एकमत है।
रक्षा मंत्री ने कहा कि चीन के साथ हमारे द्विपक्षीय संबंधों पर सीमा खासकर वास्तविक नियंत्रण रेखा पर उठ रहे नित नए मुद्दों के कारण आंच आ रही है। हाल की घटनाएं कोई अपवाद नहीं है।
उन्होंने कहा कि चीन से लगी हमारी सीमा की रक्षा के लिए सीमावर्ती सड़कों तथा अग्रिम हवाई पट्टियों के विकास पर पूरा ध्यान दिया जा रहा है।
बैठक में लद्दाख क्षेत्र में सुरक्षा हालातों की समीक्षा की गई। इसमें एंटनी को घुसपैठ के मुद्दे के शांतिपूर्ण समाधान खोजने के विकल्पों के बारे में अवगत कराया गया। चीनी सैनिक भारतीय क्षेत्र में 19 किमी अंदर तक घुसपैठ कर तंबू गाड़ कर बैठे हुए है और इस इलाके पर अपना दावा कर रहे हैं।
बैठक में राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार शिवशंकर मेनन, रक्षा सचिव शशिकांत शर्मा, सेना प्रमुख जनरल बिक्रम सिंह, वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल एनएके ब्राउन और नेवी प्रमुख एडमिरल डीके जोशी भी मौजूद थे।
तीसरी फ्लैग मीटिंग में भी नहीं बनी बात
लद्दाख के दौलत बेग ओल्दी (डीबीओ) में 19 किमी अंदर घुसकर आ बैठे चीनी सैनिकों के मुद्दे पर भारत और चीन के बीच चुशूल में तीसरी फ्लैग मीटिंग हुई लेकिन इसमें भी कोई समाधान नहीं निकल सका।
घुसपैठ के मुद्दे पर दोनों देशों के बीच टकराव की स्थिति जस की तस बनी हुई है। दोनों देशों के ब्रिगेडियर स्तर के अधिकारियों के बीच बैठक सुबह 11:00 बजे शुरू हुई।
करीब साढ़े तीन घंटे से भी अधिक वक्त तक चली बैठक में टकराव का समाधान नहीं निकल सका। चीन अधिकारी अपनी उस मांग पर अड़े हुए हैं कि भारत को पूर्वी लद्दाख में विकसित किए जाए ढांचागत निर्माण को ध्वस्त करे। हालांकि भारत ने भी अपना रुख स्पष्ट करते हुए कहा कि चीनी सैनिकों को भारतीय क्षेत्र से बिना शर्त वापसी करनी होगी।