आम आदमी पार्टी के नेता कुमार विश्वास एक के बाद एक मुश्किलों में फंसते जा रहे हैं। मुस्लिमों की भावनाओं के भड़काने के मामले के बाद अब उन पर सिख धर्म को मानने वालों की भावनाएं भड़काने का आरोप लगा है।
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इससे पहले कुमार विश्वास पर लखनऊ और बरेली में धार्मिक भावनाएं आहत करने के मामले में एफआईआर दर्ज कराई गई थी। एक के बाद एक विवाद और अपनी ही पार्टी में शुरू हुई बगावत के कारण कुमार विश्वास पार्टी के लिए बड़ी मुश्किलें खड़ी कर रहे हैं।
धार्मिक भावनाओं के अलावा उन पर नस्लवाद जैसे गंभीर आरोप भी लगे हैं, जिस पर केरल कांग्रेस की ओर से उनके खिलाफ आपत्ति दर्ज कराई गई थी।
गुरु ग्रंथ साहिब और सिखों का अपमान
कवि से नेता बने कुमार विश्वास के लिए उन्हीं के कवि सम्मेलन एक के बाद एक मुसीबत खड़े कर रहे हैं। इस बार मामला मुंबई का है, जहां चेंबूर थाने में कुमार विश्वास के खिलाफ मामला दर्ज कराया गया है।
कुमार विश्वास पर आरोप है कि उन्होंने अपने कवि सम्मेलन में पवित्र गुरु ग्रंथ साहिब और सिख समुदाय का मजाक उड़ाया है। जिससे सिख समुदाय की भावनाओं को ठेस पहुंची है।
कुमार विश्वास के खिलाफ 295(ए), 156 और आईटी एक्ट के तहत मामला दर्ज कराया गया है। हालांकि सबूत के तौर पर पुलिस के पास कवि सम्मेलन की वो फुटेज है, जिसमें सिख समुदाय के खिलाफ टिप्पणी की थी। ये पूरा मामला हालांकि काफी पुराना है। यह टिप्पणी एक कवि सम्मेलन में की गई थी।
मुस्लिम धर्म पर की थी टिप्पणी
मुस्लिम धर्म के खिलाफ की गई टिप्पणी पर भी कुमार विश्वास का काफी विरोध हुआ। लखनऊ से लेकर दिल्ली और अमेठी तक इस मामले को लेकर काफी बवाल मचा।
दरअसल कवि सम्मेलन के दौरान कुमार विश्वास ने एक विवादास्पद टिप्पणी की थी। जिसको लेकर नाराज मुस्लिम अनुयायियों ने उनके खिलाफ प्रदर्शन किया।
सबसे पहले लखनऊ में हुसैनी टाइगर्स नाम के एक संगठन में कुमार विश्वास ने खिलाफ प्रदर्शन किया। जिसके चलते कुमार विश्वास को अपना कार्यक्रम रद्द करके वापस जाना पड़ा था।
इसके बाद अमेठी में कुमार विश्वास की प्रेस कांफ्रेस के दौरान समाजवादी पार्टी के यूथ विंग के सदस्य ने जमकर हंगामा काटा था और धर्मों के अपमान पर विरोध जताया था।
हिंदू धर्म पर टिप्पणी का है आरोप
कुमार विश्वास की धार्मिक टिप्पणियां सिर्फ एक समुदाय तक सीमित नहीं था। एक के बाद एक कुमार विश्वास ने कई धर्मों पर अपने कवि सम्मेलनों के दौरान टिप्पणी की।
इन्हीं विवादास्पद टिप्पणियों के कारण कुमार विश्वास हर किसी के निशाने पर आए और लगातार आलोचना के शिकार बने।
दरअसल, कुमार विश्वास ने भगवान शिव के तांडव को लेकर अपने कवि सम्मेलन के दौरान टिप्पणी की थी। जिसके बाद काफी हंगामा हुआ और लोगों ने अपनी नाराजगी जताई। सोशल मीडिया में भी इस मामले को लेकर काफी कुमार विश्वास की आलोचना की गई थी।
केरल की नर्सों को कहा काली-पीली
कुमार विश्वास के विवादित बोल सिर्फ धर्मों तक सीमित नहीं रहे थे। अपने कवि सम्मेलनों में कुमार ने रंग को लेकर भी टिप्पणियां कीं।
विश्वास ने एक स्टेज शो के दौरान कहा था कि पहले अस्पतालों में केरल से आईं काली-पीली नर्से होतीं थी, जिन्हें देख लोग स्वाभाविक रूप से उन्हें सिस्टर कहते थे। लेकिन आजकल उत्तर भारत से नर्सें आने की वजह से लोग अस्पतालों में रुकना पसंद करते हैं।
विश्वास की ऐसी टिप्पणी पर अखिल भारतीय प्रशिक्षित नर्स संघ ने कड़ा रूख अपनाया था और केरल के मुख्यमंत्री ने अरविंद केजरीवाल से इस मुद्दे पर माफी मांगने को कहा।
कुमार के कवि सम्मेलन बने पार्टी के लिए मुसीबत
कुमार विश्वास की टिप्पणियों को लेकर हो रहे हंगामा के बीच हर बार शर्मिंदगी आम आदमी पार्टी को देनी पड़ रही है। कभी कुमार को लेकर अरविंद केजरीवाल माफी मांगते हैं तो कभी पार्टी के प्रवक्ताओं को।
कुमार की टिप्पणियों पर उनकी ही पार्टी में भी विरोधी स्वर उठने लगे हैं। जानी मानी नृत्यांगना मल्लिका साराभाई ने पार्टी में शामिल होती ही कुमार विश्वास की सोच को लेकर सवाल उठाए थे।
साराभाई ने कहा था कि कुमार पहले अपने विचार साफ करें। साराभाई ने सवाल उठाए कि वह बताएं कि महिलाओं और समलैंगिक लोगों पर उनकी क्या राय है?
लगातार उठ रहे सवालों को लेकर जब कुमार से माफी की मांग की जाने लगी तो उन्होंने उल्टे दूसरे ही नेताओं पर निशाना साधने लगे। बेतुका बयान देते हुए कुमार विश्वास ने कहा कि क्या राज बब्बर फिल्मों में किए रेप सीन को लेकर माफी मांगेंगे।
हालांकि, इससे पहले उन्होंने कहा कि उनकी मंशा किसी की भावनाओं को ठेस पहुंचाना नहीं था। ये सारी टिप्पणियां एक अलग परिस्थितियों में कवि सम्मेलनों के दौरान कही थी।
अब चाहें कविराज माफी मांगे या नहीं लेकिन उनके पुराने कवि सम्मेलन उनका पीछा नहीं छोड़ रहे हैं। और उनके लिए मुसीबत बनते जा रहे हैं।