मध्यप्रदेश के चर्चित व्यापमं घोटाले में एक नया मोड़ आ गया है। छत्तीसगढ़ के कांकेर जिले में मामले के 8वें अभियुक्त फर्मासिस्ट विजय सिंह की मौत संदिग्ध परिस्थितियों में हो गई है।
इससे पहले राज्यपाल राम नरेश यादव के बेट शैलेश की भी मौत हो गई थी, जो इस मामले में 7 वां सस्पेक्ट था। विजय सिंह व्यापमं के तीन मामलों में अभियुक्त था। उसकी लाश बीजेपी के विधायक के लॉज से मिली है।
विजय सिंह मध्य प्रदेश के रीवा जिले का रहने वाला था, और साजापुर जिले की जेल में कार्यरत था। उसके फोन से आखिरी कॉल 17 तारीख को भोपाल के एक वकील को की गई थी।
कोर्ट की सुनवाई से पहले गायब था, विजय
इस मामले में एसटीएफ ने पूर्व मंत्री लक्ष्मी कांत शर्मा के ओएसडी ओपी शुक्ला के भाई को गिरफ्तार किया है। विजय के भाई अजय ने कहा है कि 16 तारीख को वह रायपुर रेलवे स्टेशन पर भोपाल के लिए ट्रेन का इंतजार कर रहा था।
17 तारीख को उसने वकील को मिलने के लिए फोन भी किया था, इसका मतलब कि वो भोपाल जरूर आया होगा। उसने कहा कि विजय भोपाल की स्पेशल कोर्ट में सुनवाई से पहले ही गायब हो गया था।
विजय को एसटीएफ ने गिरफ्तार किया था,लेकिन उसे फरवरी में बेल मिल गई थी। उसके परिवारीजनों के मुताबिक कुछ ही दिन पहले उसे एसटीएफ ने दूसरे केस के लिए सम्मन जारी किया था।
साजिश का शिकार हुआ है विजय
कांकेर पुलिस इस मामले को आत्महत्या मान रही है, लेकिन विजय के घर वालों का कहना है कि वो किसी साजिश का शिकार हुआ है, क्योंकि उसका बैग, मोबाइल फोन और अन्य सामान गायब है।
विजय के भाई का कहना है जिस कमरे से उस के भाई की लाश बरामद हुई है वहां से किसी भी तरह के जहर बरामद की होने के सबूत नहीं है। वो कांकेर अपनी पत्नी रीना से मिलने गया था, जो वहीं शिक्षा विभाग में काम करती है।
कांकेर एसएचओ दीनदयाल ने कहा है कि इसकी लाश बीजेपी विधायक के लॉज से बरामद हुई है। हमने फॉरेंसिक जांच के लिए सैंपल भेज दिए हैं।
गवाह की कार को ट्रक ने टक्कर मारी
व्यापमं मामले में जहां विजय की मौत बात सामने आई है वहीं, इसी मामले में गवाह प्रशांत पाण्डेय की कार को इंदौर में एक ट्रक ने टक्कर मार दी। उस वक्त उनके साथ उनका परिवार भी था।
इस हादसे में सभी को चोटें आई हैं। प्रशांत ने ट्रक चालक पर जान से मारने का आरोप लगाया है।इस हादसे के बाद प्रशांत ने इंदौर के ही राजेन्द्र नगर में मामला दर्ज कराया है।
बतातें चले कि व्यापमं मामले में दिग्विजय सिंह प्रशांत को अपना मुख्य स्रोत बताते रहे हैं। घोटाले से जुड़ी अधिकतर जानकारियां प्रशांत ने ही उपल्ब्ध कराई थी।इस मामले में अब तक 8 अभियुक्तों की जान जा चुकी है। अधिकतर मौते संदिग्ध परिस्थितियों में हुई हैं।