चुनाव आयोग ने कैश सब्सिडी योजना के ऐलान के समय को लेकर केंद्र सरकार के फैसले पर सवाल उठाया है। आयोग ने कहा कि इस योजना के ऐलान के वक्त को टाला जा सकता था। आयोग का कहना है कि गुजरात विधानसभा चुनाव के चलते केंद्र सरकार कैश सब्सिडी योजना की घोषणा से बच सकती थी।
आयोग ने सरकार को गुजरात के चार जिलों और हिमाचल प्रदेश के दो जिलों में इस योजना के कार्यान्वयन टालने को कहा है। गुजरात और हिमाचल प्रदेश में विधानसभा चुनाव के चलते चुनाव आचार संहिता पहले से लागू है। ऐसे में इस योजना के ऐलान का वक्त सही नहीं है और इसे टाला जा सकता था। सरकार को चुनाव आचार संहिता का पालन करना चाहिए।
इस मसले पर भाजपा समेत विपक्ष ने सरकार पर हल्ला बोलते हुए आरोप लगाया था कि गुजरात चुनाव में मतदाताओं को लुभाने के लिए ही यह कदम उठाया गया। कैश सब्सिडी को सीधे आम आदमी के खाते में पहुंचाने की सरकार की मंशा पर उंगली उठाते हुए विपक्षी दलों ने कहा कि योजना के ऐलान का गलत समय चुना गया।
हालांकि विपक्ष के आरोपों को खारिज करते हुए केंद्रीय दूर संचार मंत्री कपिल सिब्बल और सूचना प्रसारण मंत्री मनीष तिवारी ने कहा कि पिछले बजट में तत्कालीन वित्तमंत्री प्रणब मुखर्जी ने अपने भाषण में इसकी घोषणा की थी। अब उस घोषणा पर अमल किया गया। सरकार का मानना है कि प्रत्यक्ष या परोक्ष तौर पर चुनाव आचार संहिता का कोई उल्लंघन नहीं किया गया।
दूसरी ओर भाजपा, जदयू, भाकपा से लेकर सपा ने आरोप लगाया कि सरकार ने गुजरात के मतदाताओं को लुभाने के लिए इस योजना का ऐलान किया। भाजपा प्रवक्ता रविशंकर प्रसाद ने कहा कि सरकार को बताना चाहिए कि राजस्थान में सीधे नकदी हस्तांतरण योजना विफल क्यों हुई। भाजपा सार्वजनिक वितरण प्रणाली खत्म करने के सख्त खिलाफ है। जदयू नेता शिवानंद तिवारी ने इसे मतदाताओं को लुभाने का प्रयास करार दिया।
सपा महासचिव रामगोपाल यादव ने भी सरकार की खिंचाई करते हुए कहा कि इसके ऐलान का समय गलत है, गुजरात के मतदाताओं को लुभाने के लिए इसकी घोषणा की गई। भाकपा सचिव डी राजा ने कहा कि कांग्रेस शुरू से ही ऐसे हथकंडे अपनाती रही।