अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार शाहरूख शमशाद से जबरदस्ती इस्तीफा लेने के आरोपों से घिरे कुलपति जमीरूद्दीन शाह से इलाहाबाद हाईकोर्ट ने भी जवाब तलब कर लिया है।
बृहस्पतिवार को रजिस्ट्रार की याचिका पर सुनवाई कर रही मुख्य न्यायाधीश डॉ. डीवाई चंद्रचूड और न्यायमूर्ति पीकेएस बघेल की खंडपीठ ने कुलपति और प्रतिकुलपति को सात जनवरी तक व्यक्तिगत हलफनामा देने का निर्देश दिया है। खंडपीठ ने रजिस्ट्रार द्वारा लगाए गए आरोपों को काफी गंभीर माना है।
याची के वकील अनूप त्रिवेदी ने कोर्ट को बताया कि 29 सितंबर को कुलपति ने रजिस्ट्रार को सुबह साढ़े नौ बजे अपने कार्यालय बुलाकर इस्तीफा लिखवा लिया। इसके बाद रजिस्ट्रार अपने घर आए और कुलपति की ई-मेल आईडी पर इस्तीफा वापस लेने का ई मेल भेज दिया।
इस बीच कुलपति ने प्रो वीसी के माध्यम से एक पत्र लिखकर रजिस्ट्रार को उनका इस्तीफा स्वीकार करने की जानकारी दी। मगर जैसे ही उनको रजिस्ट्रार के ई मेल की जानकारी हुई प्रति कुलपति ने उसी तारीख और उसी नंबर का दूसरा पत्र बना दिया जिसमें लिखा था कि उनका इस्तीफा एमएमयू एक्ट की धारा 29 के तहत स्वीकार किया जाता है। उनकी ई मेल से भी छेड़छाड़ की गई।
अधिवक्ता की बहस थी कि विश्वविद्यालय परिनियम के अनुसार रजिस्ट्रार का नियुक्ति प्राधिकारी गवर्निंग काउंसिल है। इसलिए इस्तीफा काउंसिल ही स्वीकार कर सकती है। कुलपति ने अपने क्षेत्राधिकार से बाहर जा कर कार्य किया है।
खंडपीठ ने एएमयू के अधिवक्ता से जानना चाहा कि कुलपति के समक्ष ऐसी क्या जल्दबाजी थी कि उन्होंने साढ़े नौ बजे दिया गया इस्तीफा दस बजे स्वीकार कर लिया। उन पर लगाए गए आरोप काफी गंभीर हैं।
कोर्ट ने गवर्निंग काउंसिल की अक्तूबर में हुई दो बैठकों और इस्तीफे से संबंधित समस्त दस्तावेज भी तलब कर लिया है। इस मामले की अगली सुनवाई 13 जनवरी को होगी।