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मोदी सरकार में शाह की होगी ये जिम्मेदारी

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उत्तर प्रदेश में किला फतह कराने वाले भाजपा के ताकतवर नेता अमित शाह की नरेंद्र मोदी सरकार में अहम भूमिका रहेगी। गुजरात में आनंदी बेन पटेल को अपना उत्तराधिकारी बनाकर मोदी ने शाह को दिल्ली में ही बनाए रखने की तस्वीर साफ कर दी है।
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गुजरात में आनंदी बेन और अमित शाह को मोदी की दो आंखें माना जाता रहा है। इसलिए मोदी के उत्तराधिकारी के तौर पर आनंदी बेन के साथ अमित शाह का नाम भी चर्चा में था।

गुजरात की कमान आनंदी बेन को सौंपे जाने से साफ हो गया है कि शाह दिल्ली में रहकर मोदी की मदद करेंगे।

अम‌ित शाह पर कई मामले

संभावना जताई जा रही है कि मोदी शाह को अपने साथ सरकार में रख सकते हैं। हालांकि सरकार में शामिल होने के मामले में शाह की राह में एक बाधा भी  है। दंगों और फर्जी मुठभेड़ों को लेकर शाह के खिलाफ कई मामले चल रहे हैं।

ऐसे में यदि अदालत से उनके खिलाफ फैसला आता है तो मोदी सरकार की किरकिरी होगी। इसलिए यह भी कहा जा रहा है कि वे संगठन में ही सक्रिय रहकर मोदी की मदद करते रहेंगे।

अगले साल कई राज्यों में चुनाव

वैसे भी अब हरियाणा और महाराष्ट्र में जल्द ही विधानसभा चुनाव होने हैं। दिल्ली में भी नए चुनाव सामने दिख रहे हैं। इनके बाद अगले साल बिहार, जम्मू और कश्मीर, झारखंड में चुनाव हैं।

मोदी की कोशिश रहेगी कि इन सभी राज्यों को फतह किया जाए। जम्मू-कश्मीर को छोड़ बाकी राज्यों में इसके आसार भी हैं। माना जा रहा है कि उत्तर प्रदेश की सफलता के मद्देनजर शाह को इन राज्यों के चुनाव प्रबंधन की कमान सौंपी जा सकती है।
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मोदी की मदद करेंगे शाह

इसके अलावा 1998 के अनुभव को देखते हुए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ व भाजपा नेतृत्व इस बार संगठन को मजबूत लोगों के हवाले करना चाहता है।

पार्टी अध्यक्ष राजनाथ सिंह का मोदी सरकार में मंत्री बनना तय है, इसलिए अगले कुछ महीनों के भीतर भाजपा को नया अध्यक्ष भी चाहिए।

हालांकि शाह को पार्टी की कमान देने की संभावना नहीं है, क्योंकि सरकार और संगठन की कमान गुजरात को ही नहीं दिया जा सकता है। इसलिए यह चर्चा है कि शाह संगठन में ही रहकर मोदी की मदद करते रहेंगे।
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