महाराष्ट्र में भाजपा की सरकार बनना लगभग तय हो गया है। राज्य विधानसभा चुनाव में भाजपा सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है। महीने भर पहले ये कयास लगाना भी मुश्किल था कि भाजपा महाराष्ट्र में सबसे बड़ी पार्टी बन सकती है।
1989 में राज्य की राजनीति में अपना पैठ बढ़ाने के लिए भाजपा ने शिवसेना के साथ गठबंधन किया था। 1995 में दोनों दलों ने राज्य में साझा सरकार भी बनाई। 1996, 1998 और 1999 केंद्र में भाजपा की सरकार भी बनी। भाजपा की सरकारों में शिवसेना साझीदार भी रही।
फिर भी महाराष्ट्र की राजनीति में शिवसेना के आगे भाजपा की हैसियत बराबरी की नहीं हो पाई। शिवसेना ने हमेशा ये माना कि केंद्र की राजनीति में भाजपा बड़ा भाई और महाराष्ट्र की राजनीति में शिवसेना।
भाजपा के नेताओं ने मन मसोसकर ही सही लेकिन शिवसेना के फर्मूले को आदेश मानकर स्वीकार किया है। हालांकि लोकसभा चुनाव में महाराष्ट्र में भाजपा-शिवसेना गठबंधन की जीत ने शिवसेना के फर्मूले की कब्र तैयार कर दी।
शिवसेना-भाजपा की दुश्मनी का कारण्ा थीं 5 सीटें
लोकसभा चुनावों में भाजपा ने 23 सीटें जीती थीं, जबकि 24 सीटों पर चुनाव लड़ा था। उसी जीत के बूते विधानसभा चुनावों भाजपा ने शिवसेना से 130 सीटें मांगी थी। जबकि शिवसेना उन्हें मात्र 119 सीटें दे रही थी। गठबंधन बचाए रखने के लिए दोनों दलों में कई दौर की बातचीत भी हुई।
शिवसेना नर्मी दिखाते हुए 125 सीटें देने के लिए तैयार भी हुई थी, लेकिन भाजपा को 130 सीटों से कम मंजूर नहीं था। लोकसभा चुनाव में शिवसेना ने भी 20 सीटें पर चुनाव लड़कर 18 सीटें जीतीं थीं। विधानसभा चुनावों में उन्हें भी जीत का भरोसा था।
महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में बहुमत के लिए उन्होंने मिशन 144+ जैसी रणनीति भी बनाई, जो बिलकुल वैसी ही थी जैसा लोकसभा चुनावों में भाजपा का मिशन 272+। 5 सीटों पर सहमति न बन पाने के कारण शिवसेना-भाजपा का 25 साल पुराना गठबंधन टूट गया।
शाह ने 6 तेजतर्रार नेताओं की टीम बनाई
भाजपा अध्यक्ष के अमित शाह के नेतृत्व में पहली बार विधानसभा चुनाव लड़ा जा रहा था।
महाराष्ट्र में 25 साल पुराना गठबंधन टूटने का ठीकरा शाह के सिर भी वैसे ही फूटा था, जैसे उद्घव ठाकरे के। ऐसे में महाराष्ट्र में भाजपा की सरकार बनाना भाजपा से अधिक शाह की निजी प्रतिष्ठा का विषय था।
शाह ने जीत के लिए वैसा ही चक्रव्यूह तैयार किया, जैसा उन्होंने उत्तर प्रदेश में तैयार किया था। प्रदेश में भाजपा के जीत पक्की करने के लिए राष्ट्रीय और स्थानीय स्तर के 6 तेजतर्रार नेताओं की एक टीम बनाई गई। उन नेताओं का चयन शाह ने ही किया।
महाराष्ट्र में भाजपा ने जो जीत दर्ज की है, उसकी रूपरेखा उन नेताओं ने ही तैयारी की। शाह की टीम में शामिल ये नेता थे-ओम माथुर, राजीव प्रताप रूड़ी, सुनील बंसल, वी सतीश, विनय सहस्त्रबुद्घे और माधव भंडारी।
मराठी नेताओं से तैयार कराई उम्मीदवारों की सूची
अमित शाह की ने महाराष्ट्र में जीत की जमीन तैयार करने के लिए दो मराठी भाषी नेताओं माधव भंडारी और विनय सहस्त्रबुद्घे को चुना था। भंडारी ने महाराष्ट्र की सभी सीटों का दौरा किया था और वहां समस्याओं और आवश्यकताओं की सूची तैयार की थी।
भंडारी ने सभी सीटों के लिए संभावित उम्मीदवारों की सूची भी बनाई थी। शिवसेना से गठबंधन टूटने के बाद भंडारी की सूची के आधार पर ही भाजपा ने राज्य में अपने उम्मीदवार तय किए थे।
राज्य में भाजपा की चुनाव प्रचार की रणनीति तैयार करने में विनय सहस्त्रबुद्घे की अहम भूमिका थी। पार्टी का घोषणापत्र और विजन डॉक्यूमेंट में भी विनय सहस्त्रबुद्घे के कई सुझाव शामिल किए गए थे। मराठी मुद्दों का अहमियत दिलाने के कारण पार्टी के भीतर उनकी तारीफ भी हुई थी।
जुलाई में सतीश और भंडारी ने किया महाराष्ट्र भ्रमण
आरएसएस के फुलटाइमर वी सतीश अमित शाह की सभी बैठकों में शामिल रहे। उन्होंने संघ ओर भाजपा के प्रचार अभियान की साझा रणनीति तैयार की। सतीश ने ही शाह को महाराष्ट्र की राजनीति के रोजाना के अपडेट दिए। शाह ने सतीश और विनय भंडारी को जुलाई में ही राज्य के भ्रमण का निर्देश दिया था।
उन्होंने महाराष्ट्र की सभी सीटों के लिए संभावित उम्मीदवारों की सूची तैयार कराई। सहस्त्रबुद्घे, भंडारी और सतीश की तरह ही ओम माथुर, राजीव प्रताप रूड़ी और सुनील बंसल की महाराष्ट्र में भाजपा की जीत की जमीन तैयार करने में अहम भूमिका रही।
ओम माथुर के बारे में कहा जाता है कि वह उन दिनों से ही शाह के करीबी हैं, जब वह गुजरात के प्रभारी थे। लोकसभा चुनावों में उत्तर प्रदेश में भाजपा को 80 में 73 सीटें दिलाने में सुनील बंसल की महत्वपूर्ण भूमिका थी।
चह्वाण के इंटरव्यू उन्हीं के खिलाफ किया इस्तेमाल
महाराष्ट्र मे माथुर को दूसरे दलों के साथ गठबंधन का जिम्मा सौंपा गया, जबकि राजीव प्रताप रूड़ी को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की रैलियों की योजना तैयार करने और उन्हें क्रियान्वित करने की जिम्मेदारी दी गई।
बंसल ने संगठन की गतिविधियों पर नजर रखी, जबकि भंडारी ने मीडिया से समन्वय बनाने का काम किया।
फड़नवीस समेत सभी उम्मीदवार के नाम पर अंतिम मुहर शाह ने ही लगाई। वह अपने फैसलों के बारे में मोदी को अवगत कराते रहे। शाह की टीम ने कैसे काम किया उसे आप एक नजीर से समझ सकते हैं।
मतदान से चंद दिनों पहले महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चह्वाण ने एक अखबार को इंटरव्यू दिया और माना कि उनकी सरकार के कई मंत्री भ्रष्टाचार में शामिल रहे। सहस्त्रबुद्घे, रूड़ी और भंडारी की टीम ने उसी दिन एक एड एजेंसी के साथ बैठक की और चह्वाण के एक-एक जवाब का काट तैयार किया।
अगले दिनों अखबारों में भाजपा का एड छपा और उसमें लोंगों से पूछा गया कि क्या आप अब भी एक ऐसा मुख्यमंत्री चुनेंगे, जिसके मंत्रियों ने भ्रष्टाचार किया और वह उनके खिलाफ कार्रवाई तक नहीं कर पाया।