भाजपा ने नए अध्यक्ष अमित शाह ने आम चुनाव में पार्टी को मिली धमाकेदार जीत को देश को कांग्रेस मुक्त करने के अपने लक्ष्य का पहला पड़ाव करार दिया है। पार्टी की राष्ट्रीय परिषद में बतौर अध्यक्ष हुई ताजपोशी के बाद उन्होंने कार्यकर्ताओं को जीत की आदत डालने की नसीहत दी।
उन्होंने कहा कि देश को पूरी तरह से कांग्रेस मुक्त करने के लिए पार्टी संगठन का देश भर में विस्तार के अलावा और कोई दूसरा विकल्प नहीं है।
उन्होंने खासतौर से पूर्वोत्तर और दक्षिण के राज्यों में संगठन को मजबूत करने का संदेश देते हुए एक नवंबर से शुरू हो रहे सदस्यता अभियान में हर बूथ से सदस्य बनाने का आह्वान किया।
'कांग्रेस मुक्त भारत का सपना'
उल्लेखनीय है कि परिषद की बैठक में न केवल 10 साल से जारी सत्ता का सूखा खत्म होने की झलक दिखाई दी, बल्कि पार्टी में हुए पीढ़ी परिवर्तन की भी छाप साफ महसूस की गई।
अब तक की परिषद की बैठक के इतर जवाहर लाल नेहरू स्टेडियम में हुई यह बैठक मोदीमय माहौल में हुई तो शाह चौतरफा छाए रहे। अध्यक्ष पद पर ताजपोशी पर परिषद की मुहर लगने के बाद शाह ने देश को भाजपायुक्त बनाने का आह्वान किया।
उन्होंने कहा कि आम चुनाव में जीत से इस लक्ष्य की महज शुरुआत हुई है। उन्होंने कहा कि संगठन के विस्तार और पार्टी की नीतियों को जन-जन तक पहुंचाने के लिए पार्टी को पंचायत से लेकर लोकसभा स्तर का चुनाव हर हाल में लड़ना होगा।
कार्यकर्ताओं में फूंका जीत का मंत्र
इसके अलावा कांग्रेस को भाजपा की विचारधारा के माध्यम से देश की राजनीति से बाहर का दरवाजा दिखाना होगा। इस दौरान आम चुनाव का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि पूर्वोत्तर तथा दक्षिण के राज्यों में पार्टी को जबर्दस्त वोट तो मिले, मगर यह सीटों में तब्दील नहीं हो पाया।
इसके लिए कमजोर संगठन को जिम्मेदार ठहराते हुए शाह ने कहा कि एक नवंबर से शुरू हो रहे सदस्यता अभियान में देश का एक भी बूथ ऐसा नहीं होना चाहिए जहां पार्टी के सदस्य न हो।
उन्होंने कहा कि कई स्थानों पर भाजपा को मजबूत बनाने का काम अभी भी बाकी है। अगर पार्टी की पहुंच नहीं बढ़ेगी तो हम ज्यादा दिनों तक शासन में नहीं रह पाएंगे।
अध्यक्ष शाह की जमकर तारीफ हुई
उल्लेखनीय है कि परिषद की बैठक में पार्टी में हुए पीढ़ीगत परिवर्तन की झलक साफ दिखाई दी।
वाजपेयी और आडवाणी की छाया से पहले ही मुक्त हो चुकी पार्टी में दूसरी पीढ़ी के नेताओं की जगह तीसरी पीढ़ी के नेता अमित शाह की अध्यक्ष पद पर हुई ताजपोशी इस परिवर्तन को बयां कर रही थी।
बैठक में एक ओर जहां प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी छाए रहे तो दूसरी ओर नए अध्यक्ष शाह की जमकर तारीफ हुई। बैठक शुरू होते ही राजनाथ सिंह ने नए अध्यक्ष के रूप में अमित शाह के नाम का प्रस्ताव किया, जिसे सर्वसम्मति से स्वीकार कर लिया गया।