विकीलीक्स ने दावा किया है कि आपातकाल (1975-77) के दौरान पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के घर अमेरिकी 'भेदिया' मौजूद था। इस जासूस को अमेरिकी दूतावास ने भेजा था। वह जासूस अमेरिकी था या भारतीय, इसकी जानकारी नहीं दी गई है।
एक अंग्रेजी अखबार में छपी खबर के मुताबिक इसी 'भेदिया' के जरिए अमेरिका को जानकारी मिली थी कि इंदिरा गांधी 1977 में आम चुनाव कराना चाहती थीं। हालांकि विकीलीक्स के केबल में यह स्पष्ट नहीं है कि इस 'भेदिया' से इंदिरा गांधी को कितनी मदद मिली।
यह भी साफ नहीं है कि आपातकाल लगाने में अमेरिका की भूमिका थी या नहीं। हालांकि विकीलीक्स केबल में इंदिरा गांधी के बेटे संजय गांधी और आरके धवन के बारे में कहा गया कि ये दोनों तानाशाह प्रवृत्ति के थे और किसी भी कीमत में इंदिरा सरकार को बचाना चाहते थे।
संजय गांधी को लेकर अहम खुलासा
विकीलीक्स ने संजय गांधी को लेकर एक और खुलासा किया है। विकीलीक्स का दावा है कि मारुति कंपनी ने ब्रिटिश एयरक्राफ्ट कॉरपोरशन (बीसीए) का एजेंट बनने की इच्छा जताई थी। मारुति में संजय के अच्छे-खासे शेयर थे।
7 जुलाई 1976 को भेजे गए केबल के मुताबिक बीएसी ने मारुति को भरोसा दिलाया था कि इस मामले में कुछ किया जा सकता है।
उस समय भारत को लड़ाकू विमानों और इंडियन एयरलाइंस को हवाई जहाजों की जरूरत थी। बाद में भारत सरकार ने ब्रिटिश कंपनी जगुआर से लड़ाकू विमान खरीदे थे। हालांकि यह डील जनता पार्टी की सरकार में हुई थी।
ललित नारायण मिश्रा की हत्या में 'आनंदमार्गी' का हाथ?
बिहार के दिग्गज कांग्रेसी नेता और पूर्व रेल मंत्री ललित नारायण मिश्रा की हत्या पर विकीलीक्स का कहना है कि इस मर्डर मिस्ट्री में आनंदमार्गी संप्रदाय का हाथ था। 2 जनवरी 1975 को मिश्रा की मौत बम धमाके में हो गई थी। उल्लेखनीय है कि इसी संप्रदाय के कुछ सदस्यों पर 1995 में पश्चिम बंगाल के पुरूलिया में हथियार गिराने के आरोप लगे।
'बिचौलिये की भूमिका निभाई राजीव गांधी ने'
इससे पहले विकीलीक्स ने दावा किया था कि पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने 1970 के दशक में स्वीडन की कंपनी साबस्तानिया के लिए बिचौलिये की भूमिका निभाई थी। यह कंपनी भारत को लड़ाकू विमान बेचना चाहती थी।
हालांकि कंपनी के साथ यह सौदा नहीं हो सका था। इस दौड़ में ब्रिटिश कंपनी जगुआर ने बाजी मार ली थी। राजीव गांधी तब राजनीति में नहीं थे। वह इंडियन एयरलाइंस में पायलट थे।
'जार्ज ने मांगी थी सीआईए से मदद'
विकीलीक्स ने पूर्व रक्षा मंत्री जार्ज फर्नांडिस के बारे में भी खुलासा किया। इसके मुताबिक खुद को अमेरिका विरोधी बताने वाले फर्नांडिस ने आपातकाल के दौरान अमेरिकी खुफिया एजेंसी सीआईए से मदद मांगी थी।
फर्नांडिस को सीआईए से पैसे लेने पर भी ऐतराज नहीं था। पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी द्वारा लगाए गए आपातकाल से लड़ने के लिए फर्नांडिस ने फ्रांसीसी सरकार से भी मदद मांगी थी।