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आतंकवादः अमेरिका ने भी मानी भारत की बात

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पाकिस्तान में आतंकवादियों की पनाहगाह को लेकर अमेरिकी रक्षा मुख्यालय पेंटागन ने चिंता जाहिर की है। अमेरिकी विशेषज्ञों का कहना है भारत और अफगानिस्तान में आतंकी समूहों की गतिविधियों को लेकर अमेरिकी नजरिए में कोई बदलाव नहीं आया है।
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उधर, न्यूयॉर्क टाइम्स ने अपने संपादकीय में लिखा है कि भारत के तगड़े विरोध को देखते हुए अमेरिका को यथार्थवादी दृष्टिकोण अपनाते हुए पाक को आर्थिक मदद रोक देनी चाहिए।

पेंटागन के प्रेस सचिव रियर एडमिरल जॉन किर्बी ने कहा कि पाकिस्तान में आतंकी समूह के कुछ संगठन लंबे समय से पनाह लिए हुए हैं जो अमेरिका के लिए चिंता का विषय है।
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अमेरिका ने माना पाक आतंकियों की सुरक्षित पनाहगाह

उन्होंने कहा कि पाकिस्तानी समकक्षों के साथ यह लंबे समय से चर्चा का विषय बना हुआ है। पेंटागन का यह बयान विदेश मंत्रालय के उस बयान के कुछ दिन बाद आया है, जिसमें कहा गया था कि वह पिछले कुछ सालों में संसद को यह प्रमाण पत्र नहीं दे पाया है कि पाकिस्तान लश्कर-ए-ताइबा और हक्कानी नेटवर्क के खिलाफ कार्रवाई कर रहा है।

कांग्रेस द्वारा प्रमाणपत्र अनिवार्य किए जाने के बाद से दोनों वर्षों 2013 और 2014 मे विदेश मंत्रालय ने पाक में आतंकियों के खिलाफ कार्रवाई और अन्य उपायों की समीक्षा की। लेकिन इस समीक्षा में यह पाया गया कि पाकिस्तान इन मानकों पर खरा नहीं उतरता, प्रमाणपत्र के अभाव में भी विदेश मंत्री को ओबामा प्रशासन द्वारी जारी धन के लिए राष्ट्रीय हित की बात करनी पड़ी।
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