नेताओं के सामने आम इंसान की जिंदगी किस कदर सस्ती है इसका शर्मनाक उदाहरण देखने को मिला पंश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता में, जहां मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के काफिले को सड़क से गुजारने के लिए जाम के बीच एक एंबुलेंस को आधे घंटे तक सड़क पर ही रोके रखा गया।
पुलिस की संवदेनहीनता इस कदर थी कि उसे एंबुलेंस के अंदर हार्टअटैक की शिकार महिला की बीमारी की गंभीरता का भी कोई एहसास नहीं हुआ। जब तक मुख्यमंत्री का काफिला सड़क से नहीं गुजरा तब तक एंबुलेंस के अंदर मौजूद महिला दर्द से तड़पती रही।
यह हाल तब रहा जब मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को उनकी सादगी के लिए जाना जाता है लेकिन उनकी पुलिस ने मुख्यमंत्री के लिए सभी संवेदनाओं और नैतिकता को ताक पर रख दिया। यह वाकया सामने आने के बाद बंगाल पुलिस को चौतरफा आलोचनाओं का सामना करना पड़ रहा है।
सीएम का काफिला निकालने के लिए रुक हुआ था ट्रैफिक
जानकारी के अनुसार जागच्चा के उनसानी निवासी मेहराजन को बुधवार सुबह अचानक छाती में तेज दर्द उठा था। उसके परिजनों ने स्थानीय डॉक्टर काजी बुलबुल को दिखाया तो उन्होंने मेहराजन को हार्ट अटैक की आशंका जाहिर करते हुए उन्हें तुंरत एसएसकेएम हॉस्पिटल में भर्ती करने की सलाह दी।
इस पर परिजनों ने तुरंत एंबुलेंस का इंतजाम किया और उन्हें अस्पताल के लिए लेकर चल दिए। उनके घर से एसएसकेएम हॉस्पिटल तक का रास्ता बामुश्किल 20 मिनट का ही था, लेकिन जैसे ही एंबुलेंस कोना एक्सप्रेस वे पर संतरागची स्टेशन रोड पर पहुंची तो पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के काफिले को निकालने के लिए ट्रैफिक रोका हुआ था।
बनर्जी दीघा से वापस कोलकाता लौट रही थी, इसलिए उनके इस रूट से निकलने की संभावना को देखते हुए पुलिस ने ट्रैफिक रोका हुआ था। हालांकि पुलिस अधिकारी खुद इस बात के लिए आश्वस्त नहीं थे कि मुख्यमंत्री सड़क मार्ग से ही आएंगी या वो हेलीकॉप्टर से भी जा सकती हैं।
सिपाही ने नब्ज चेक कर कहा अभी तो कर सकती हैं इंतजार
मेहराजन के रिश्तेदार मोहम्मद अजीज ने बताया कि उन्होंने वहां खड़े ट्रैफिक पुलिस के जवानों से उन्हें रास्ता देने की गुजारिश की। इस पर पुलिस का एक जवान उनकी एंबुलेंस के पास तक आया और मेहराजन की पल्स देखकर कहा कि मुख्यमंत्री का काफिला गुजरने तक वह इंतजार कर सकती है।
अजीज के अनुसार 20 मिनट तक इंतजार करने के बाद भी जब पुलिस ने ट्रैफिक चालू नहीं किया तो वह दोबार ट्रैफिक पुलिस के पास पहुंचे। उन्होंने वहां खड़े ट्रैफिक डीसी सुमित कुमार से बात कर अपनी परेशानी बताई। इस पर डीसी ने तुरंत एंबुलेंस को रास्ता देने के निर्देश दिए।
डीसी ने बताया कि उन्हें इस संबंध में कोई जानकारी नहीं थी कि ट्रैफिक में कोई एबुलेंस भी रोकी गई है। डीसी ने साफ कहा कि हमारी ओर से एंबुलेंस को रोकने के किसी तरह के निर्देश नहीं दिए थे, ऐसे मामलों में एबुलेंस को गुजरने के लिए प्राथमिकता दी जाती है।
डीसी के हस्तक्षेप के बाद ही मेहराजन को अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उनकी गंभीर हालत देख तुंरत भर्ती कर लिया। उनका इलाज कर रहे एक डॉक्टर ने बताया कि मेहराजन के दिल की नसें पूरी तरह बंद हो चुकी थी, फिलहाल उसकी हालत स्थिर है।