नरेंद्र मोदी को लेकर शिवसेना के तेवर कुछ नरम हुए हैं, लेकिन प्रधानमंत्री की उम्मीदवारी पर पार्टी ने अब भी अपने पत्ते नहीं खोले हैं।
पार्टी प्रमुख उद्धव ठाकरे ने कहा कि मोदी को लोकसभा चुनाव के लिए भाजपा की चुनाव अभियान समिति का चेयरमैन बनाए जाने के मौके पर उन्होंने शुभकामना दी थी।
एनडीए के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार से संबंधित सवालों को टालते हुए ठाकरे ने कहा कि इस समय सबसे बड़ी चुनौती कांग्रेस को सत्ता से बेदखल करने की है।
दिल्ली प्रवास के दौरान ठाकरे ने मीडिया से कहा कि पीएम पद का उम्मीदवार तय करने की पहली जिम्मेदारी भाजपा के संसदीय बोर्ड की है, और फिर वह शिव सेना और अकाली दल समेत अपने सभी सहयोगियों से सलाह-विमर्श करेगी।
उन्होंने कहा कि यह बात छुपी नहीं है कि नेतृत्व के मुद्दे पर उचित प्रक्रिया का पालन किया जाएगा। लोकसभा में विपक्ष की नेता सुषमा स्वराज की पीएम पद की उम्मीदवारी पर भी ठाकरे ने सवाल टाल दिया।
जब उनसे पूछा गया कि बाल ठाकरे ने अपने जीवन काल में पीएम पद के उम्मीदवार के तौर पर सुषमा स्वराज का समर्थन किया था, इस पर उन्होंने कहा कि तब किसी अन्य नेता का नाम सामने नहीं आया था।
ठाकरे ने पीएम पद के लिए विश्वसनीय चेहरे की जरुरत संबंधी अपने बयान पर भी सफाई दी। उन्होंने कहा कि उनका आशय कांग्रेस से था, जो कि अभी सत्ता में है।
ठाकरे ने माना कि राम मंदिर जैसे हिन्दुत्व से जुड़े मुद्दों के अब चुनाव में प्रभावशाली भूमिका निभाने की संभावना नहीं हैं।
उन्होंने खुद ही इसकी वजह भी बताते हुए कहा कि आज देशवासी कांग्रेस के कुशासन से बेहाल हैं और अब इन मुद्दों को जोरशोर से उठाने की आवश्यकता है।
एसोचेम के कार्यक्रम में शामिल होने दिल्ली आए ठाकरे इस दौरान पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी, वरिष्ठ नेता लाल कृष्ण आडवाणी, भाजपा अध्यक्ष राजनाथ सिंह और लोकसभा में विपक्ष की नेता सुषमा स्वराज से भी मिले।