पश्चिम बंगाल मानवाधिकार आयोग के अध्यक्ष जस्टिस अशोक गांगुली पर लगा यौन शोषण का आरोप अब बड़े बवाल में बदलता जा रहा है।
इस मामले की जांच कर रहे सु्प्रीम कोर्ट के पैनल का कहना है कि प्रथम दृष्टया ऐसा मालूम देता है कि जस्टिस गांगुली इस मामले में शामिल रहे हैं, क्योंकि घटना के वक्त वह रिटायर होने चुके थे, ऐसे में उनके खिलाफ कार्रवाई नहीं कर सकते।
कानून मंत्री कपिल सिब्बल ने इस पर कड़ी नाराजगी जताई है। सिब्बल ने कहा, "जब पैनल खुद कह रहा है कि जस्टिस गांगुली इस मामले में शामिल रहे हैं, तो कार्रवाई क्यों नहीं की जा रही।"
दोषी पाए गए, तो कार्रवाई भी होनी चाहिएः सिब्बल
उन्होंने कहा, "पैनल का कहना है कि वह घटना के वक्त रिटायर हो चुके थे, ऐसे में उनके खिलाफ कोई कदम नहीं उठाया जा सकता। लेकिन अगर ऐसा है तो उनके खिलाफ जांच क्यों बैठाई गई। अगर जांच हुई और दोषी पाए गए, तो कार्रवाई भी होनी चाहिए।"
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जस्टिस गांगुली को अब चौतरफा विरोध का सामना करना पड़ रहा है। उनकी तरफदारी करने वाले भाजपा नेता सुब्रमण्यम स्वामी ने भी रुख बदल लिया है।
स्वामी ने बदला स्टैंड
उन्होंने कहा, "जो पार्टी का स्टैंड है, वही मेरा स्टैंड है। अब साबित हो गया है कि वह दोषी हैं, तो उन्हें सजा मिलनी चाहिए। एफआईआर दर्ज होनी चाहिए। वह पश्चिम बंगाल मानवाधिकार आयोग के अध्यक्ष पद पर नहीं रह सकते।"
राष्ट्रीय महिला आयोग भी जस्टिस गांगुली को नोटिस भेजने की तैयारी कर रहा है। एनसीडब्ल्यू अध्यक्ष ममता शर्मा ने कहा, "मैं सोचती हूं कि उनके खिलाफ कार्रवाई हानी चाहिए।"
तृणमूल कांग्रेस के नेता सुखेंदु राय का कहना है कि भले तकनीकी कारणों की वजह से पैनल की वजह से आगे नहीं बढ़ सकते, लेकिन गुनाह साबित होने पर उन्हें नैतिकता के आधार पर कुर्सी छोड़ देनी चाहिए।
गिरफ्तार किया जाना चाहिएः मेनका
जेडीयू नेता अली अनवर के मुताबिक जस्टिस को अब पद नहीं रहना चाहिए और साथ ही उस लड़को भी सामने आना चाहिए, जिसने यह खुलासा किया है।
भाजपा नेता मेनका गांधी ने साफगोई से कहा कि जस्टिस गांगुली को तुरंत गिरफ्तार किया जाना चाहिए और इस मामले में जीरो टोलरेंस की रणनीति अपनानी चाहिए।
सुप्रीम कोर्ट के तीन जजों की समिति ने जस्टिस अशोक कुमार गांगुली पर लगे यौन उत्पीड़न के आरोपों को प्रथम दृष्ट्या सही माना है।
एफआईआर दर्ज करने की मांग तेज
समिति ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि लॉ इंटर्न के बयानों और अन्य साक्ष्यों से जाहिर होता है कि पूर्व जज ने अवांछित आचरण किया, जो यौन दुर्व्यवहार के दायरे में आता है।
हालांकि चीफ जस्टिस पी सदाशिवम ने यह भी साफ किया है कि सुप्रीम कोर्ट अपने स्तर से जस्टिस गांगुली के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं करेगा, क्योंकि पिछले साल 24 दिसंबर को हुई घटना के दिन जस्टिस गांगुली सुप्रीम कोर्ट से रिटायर हो चुके थे और युवती भी इंटर्न के तौर पर सुप्रीम कोर्ट के रोल पर नहीं थी।
लेकिन सुप्रीम कोर्ट की समिति की रिपोर्ट सामने आने के बाद जस्टिस गांगुली के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग तेज हो गई है। दिल्ली पुलिस उनके खिलाफ कार्रवाई करने को लेकर कानूनी सलाह मांग रही है।