रिटेल में एफडीआई पर संसद में जारी गतिरोध तोड़ने में जुटी सरकार ने इस मामले में अब अपनी कवायद तेज कर दी है। इस मुद्दे पर जारी वैचारिक मतभेद को दूर करने के लिए संसदीय कार्य मंत्री कमलनाथ ने सोमवार को सर्वदलीय बैठक बुलाई है।
वैसे एफडीआई के मुद्दे पर तृणमूल कांग्रेस का साथ खो चुकी यूपीए सरकार इस मामले को अपने प्रमुख सहयोग दल द्रमुक को मनाने में असफल रही है। उधर, प्रमुख विपक्षी दल भाजपा ने एफडीआई पर बहस कराने और मतदान की मांग पूरी न होने पर आगे भी विरोध जारी रखने का ऐलान किया है। साथ ही पार्टी ने संसद में चल रहे गतिरोध के लिए प्रधानमंत्री और कांग्रेस को जिम्मेदार ठहराया है। सरकार बहस के लिए तैयार है, लेकिन सहयोगी दलों के रुख को देखते हुए वह मतदान कराने से बच रही है।
रिटेल में एफडीआई पर सर्वदलीय बैठक से पहले कांग्रेस सहयोगी दल द्रमुक से कोई आश्वासन हासिल नहीं कर सकी है। द्रमुक प्रमुख एम. करुणानिधि को एफडीआई के पक्ष में करने के लिए कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और केंद्रीय मंत्री गुलाम नबी आजाद ने रविवार को उनसे मुलाकात की। 90 मिनट की तक चली इस बैठक में आजाद करुणानिधि को अपनी ओर नहीं कर सके। द्रमुक की ओर से भी इस मुद्दे पर संसद में बहस और नियमों के मुताबिक मतदान की मांग की जा रही है।
कांग्रेस सर्वदलीय बैठक से पूर्व खुद को मजबूत करने की एक कोशिश में जुटी ही है, लेकिन अभी तक उसे इसमें सफलता नहीं मिली है। गौरतलब है कि सरकार और कांग्रेस से नाता तोड़ चुकी तृणमूल कांग्रेस लगातार एफडीआई का विरोध कर रही है। सरकार का बाहर से समर्थन दे रही सपा और बसपा का रुख भी इस मुद्दे पर अभी तक साफ नहीं है।
वहीं प्रमुख विपक्षी दल भाजपा और वामपंथी पार्टियां लोकसभा में नियम 184 के तहत चर्चा कराने की मांग कर रहे हैं। इस नियम के तहत मतदान का प्रावधान है। दूसरी ओर, सहयोगी दलों का रुख भी बहुत हद तक सकारात्मक नहीं है। ऐसे में सरकार मतदान कराने से बचना चाहती है। वह नियम 193 के तहत लोकसभा में बहस के लिए तैयार है।
इस बीच, भाजपा नेता एम. वेंकैया नायडू ने संसद में चल रहे गतिरोध का ठीकरा प्रधानमंत्री और कांग्रेस पर फोड़ा है। नायडू ने सरकार की ओर से दिए गए उस आश्वासन का भी हवाला दिया जो गत वर्ष 7 दिसंबर को संसद में दिया गया था। उन्होंने कहा कि अगर बहस कराने और मतदान की मांग स्वीकार नहीं की गई तो उनका विरोध जारी रहेगा।