गुआंतनामो बे दुनिया की सबसे खतरनाक जेल है, जहां सबसे खूंखार आतंकवादियों
को कैद किया जाता है। वहां सजा काट चुके अल-कायदा के एक आतंकी की कविता इन
दिनों हमारे देश की एक यूनिवर्सिटी में पढ़ाई जा रही है।
केरल की कालीकट यूनिवर्सिटी में बीए और बीएससी कोर्स में थर्ड सेमेस्टर के कोर्स में शामिल इस कविता ने बवाल खड़ा कर दिया है।
विवाद इस बात पर है कि क्या एक व्यक्ति जो किसी के लिए आतंकवादी है, दूसरे के लिए आजादी के लिए लड़ाई में शामिल एक सैनिक हो सकता है।
इब्राहिम अल रुबाइश की कविता 'ओड टू द सी' को टेक्स्ट लिटरेचर एंड कंटेम्पररी इश्यू सिलेबस में जगह दी गई है।
इस आतंकवादी के साथ-साथ छात्रों को पाब्लो नेरूदा, सिल्विया प्लाथ और माया एंजेलू जैसे दिग्गजों की कृतियां पढ़ाई जा रही हैं।
सबसे पहले 2006 में एम्नेस्टी इंटरनेशनल की ओर से प्रकाशित 'पॉयम्स फ्रॉम गुआंतानामोः द डिटेनेज स्पीक' में इसे जगह दी गई थी।
लेकिन इस कविता को लेकर अब विरोध तेज रहा है। कालीकट यूनिवर्सिटी के कुछ शिक्षकों का कहना है कि यूं तो कविता की सामग्री के साथ कोई दिक्कत नहीं है, लेकिन इसका लेखक अब भी अल-कायदा से जुड़ा हो सकता है।
सऊदी नागरिक रुबाइश को 2001 में पाकिस्तान से गिरफ्तार किया गया था और वह पांच साल तक अमेरिका की कैद में गुआंतनामो में रहा।
बाद में उसे सऊदी अरब भेज दिया गया था। इस कविता को सिलेबस में शामिल करने का बचाव करते हुए गवर्नमेंट कॉलेज के असिस्टेंट प्रोफेसर सी आर मुरुगन बाबू ने कहा कि इस कविता से समकालीन जगत में गर्माए मुद्दे पर विचार-विमर्श करने से आसानी होगी।