एसडीएम दुर्गा शक्ति नागपाल के निलंबन को जायज ठहराने पर अड़े उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव अब सवालों के घेरे में फंसते नजर आ रहे हैं।
सपा नेता नरेंद्र भाटी ने खुलेआम दावा किया है कि उन्हीं के कहने पर महज 41 मिनट में मुख्यमंत्री ने एसडीएम को निलंबित कर दिया।
जबकि मुख्यमंत्री ने एक दिन पहले दावा किया था कि एलआईयू (लोकल इंटेलिजेंस यूनिट) की रिपोर्ट के आधार पर दुर्गा के खिलाफ कार्रवाई की गई है। अब ऐसे में सीएम के तथ्य पर ही सवालिया निशान लग गया है।
अखिलेश से इस्तीफे की मांग
इसी के चलते एक ओर विपक्षी दलों ने इसे मुद्दा बनाकर अखिलेश से इस्तीफे की मांग कर डाली है। वहीं दूसरी ओर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने भी अवैध खनन मामले पर केंद्र व राज्य सरकार से जवाब तलब किया है।
हालांकि दुर्गा शक्ति का निलंबन रद्द करने संबंधी याचिका पर कोर्ट ने साफ कर दिया है कि इस पर सुनवाई तभी हो सकती है, जब खुद दुर्गा कोर्ट में पेश हों।
दुर्गा को मुलायम के खिलाफ चुनाव लड़ने का न्योता
भाटी ने गौतम बुद्ध नगर में एक जनसभा में ताल ठोककर कहा कि उन्हीं के कहने पर दुर्गा शक्ति नागपाल को सस्पेंड किया गया। टीवी चैनलों पर चल रहे एक वीडियो में भाटी कहते दिख रहे हैं कि उन्हीं के कहने पर दुर्गा शक्ति को हटाया गया।
सीएम के पास है इनका जवाब?
1. क्या नरेंद्र भाटी के कहने पर ही हुआ निलंबन?
2. एसएसपी ने फोन पर भाटी को सूचना क्यों दी?
3. कहीं ओमेंद्र खारी के खिलाफ एफआईआर तो नहीं निलंबन की वजह?
4. निलंबन में इतनी जल्दबाजी क्यों, जांच का क्यों नहीं किया गया इंतजार?
5. सांप्रदायिकता के नाम पर कितने अफसर हुए हैं सस्पेंड?
90 दिन तक ही निलंबित रख सकती है सरकार
निलंबित आईएएस अफसर दुर्गाशक्ति नागपाल को प्रदेश सरकार केवल 90 दिन तक ही निलंबित रख सकती है। इससे ज्यादा समय तक निलंबन के लिए उसे केन्द्र की अनुमति लेनी जरूरी होगी। अगर केन्द्र निलंबन के फैसले पर अपनी रजामंदी नहीं देता है तो राज्य को उनका निलंबन वापस लेना पड़ेगा। इसकेअलावा अगर केंद्र राज्य के फैसले पर अपनी मुहर लगाती है तो नागपाल का निलंबन एक साल तक बढ़ सकता है।
कोर्ट ने थपथपाई ‘बहादुर’ दुर्गा की पीठ
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने भी आईएएस अधिकारी दुर्गा शक्ति नागपाल का पक्ष लेते हुए उन्हें बहादुर अफसर बताया है। जस्टिस देवी प्रसाद सिंह और जस्टिस अशोक पाल सिंह की पीठ ने दुर्गा के काम की सराहना करते हुए कहा कि रेत माफिया पर लगाम लगाने के लिए उन्होंने काफी प्रयास किए हैं। हालांकि निलंबन के मामले में हस्तक्षेप करने से इंकार करते हुए कहा कि अगर खुद दुर्गा कोर्ट में अपील करें, तो इस मामले की सुनवाई हो सकती है।
'दुर्गा मामले में गौतमबुद्ध नगर के डीएम भी निलंबित हों'
'41 मिनट में दुर्गा सस्पेंड हो गई'
भाटी के अनुसार, ‘मैंने मुलायम सिंह यादव और अखिलेश यादव से 10.30 बजे बात की और 11.11 बजे सस्पेंशन ऑर्डर यहां पहुंच गया। सिर्फ 41 मिनट के भीतर लखनऊ से आदेश आ गया और वह सस्पेंड हो गई।’
भाटी के बयान का बचाव करते हुए समाजवादी पार्टी प्रवक्ता राजेंद्र चौधरी ने कहा, ‘रमजान के महीने में मस्जिद की दीवार तोड़ी गई। इससे सांप्रदायिक माहौल खराब होने का डर पैदा हो गया था। भाटी ने सीएम को समय पर सूचना दी, जिसके आधार पर आईएएस अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई की गई।’
बयान से पलटे भाटी
हालांकि बाद में मीडिया में सफाई देते हुए भाटी ने कहा कि मेरे बयान को गलत तरीके से पेश किया गया है। आईएएस अधिकारी को सस्पेंड कराने वाला भला मैं कौन होता हूं।
नरेंद्र भाटी ने कहा कि मैंने सिर्फ इतना कहा था कि सरकार सजग है और आम जनता के हित में काम कर रही है। मैंने उन्हें यहां के हालात के बारे में जानकारी दी थी और मुख्यमंत्री ने एसडीएम को सस्पेंड कर दिया।
विपक्षी दलों का हमला
भाजपा के पूर्व अध्यक्ष नितिन गडकरी ने कहा कि सपा सांप्रदायिक और जातिगत मुद्दों को हवा दे रही है। जबकि भाजपा प्रवक्ता विजय बहादुर पाठक और विधानसभा में विपक्ष के नेता स्वामी प्रसाद मौर्य ने तो अखिलेश से नैतिक आधार पर इस्तीफा तक मांग लिया है। पूर्व आईपीएस अधिकारी किरण बेदी ने भी समाजवादी पार्टी पर सच छिपाने का आरोप लगाया है।