उत्तर प्रदेश से भाजपा के विधायक और महापंचायत में सांप्रदायिक भावनाएं भड़काने के आरोपी हुकुम सिंह का कहना है कि मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने दंगा प्रभावित इलाकों का दौरा सिर्फ अपने कैबिनेट सहयोगी और सपा नेता आजम खान का गुस्सा शांत करने के लिए मुजफ्फरनगर गए थे।
18 महीने की सरकार के दौरान अखिलेश पर कई बार आरोप लगे हैं कि वह उत्तर प्रदेश में सांप्रदायिक दंगों पर काबू पाने में अक्षम साबित हुए है।
मुजफ्फरनगर में दंगे 7 सितंबर को भड़के थे, लेकिन अखिलेश सात दिन के बाद वहां गए। इलाहाबार हाई कोर्ट ने भी उनकी सरकारी से जवाब मांगा है कि प्रदेश में इस तरह की कितनी घटनाएं अब तक हुई हैं।
यादव और आजम का नाम लिए बिना हुकुम सिंह ने कहा, "मुख्यमंत्री सिर्फ संदेश देना चाहते थे, क्योंकि उनके कैबिनेट सहयोगी खफा थे। अगर वह अपने दौरे को लेकर गंभीर होते, तो सभी परिवारों से मुलाकात करते।"
हुकुम सिंह ने अपने बचाव में कहा कि उन्होंने सभा में कुछ भी आपत्तिजनक नहीं कहा था। उन्होंने कहा, "मैं वहां सिर्फ दस मिनट के लिए था। मैंने देखा कि कुछ लोगों के हाथ में बंदूक हैं। मैं हैरान था कि पुलिस ने उन्हें हथियार साथ लाने की इजाजत कैसे दी।"
हिंसा के हफ्ते भर बाद भी हजारों लोग शरणार्थी शिविरों में रह रहे हैं, जबकि सरकार अब तक किसी नेता को गिरफ्तार नहीं कर सकी है, हालांकि कई के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है।
भाजपा के चार विधायकों के अलावा बहुजन समाज पार्टी के सांसद कादिर राणा और कांग्रेस के दो पूर्व सांसदों के खिलाफ भी मामला दर्ज किया गया है।