उत्तर प्रदेश में अखिलेश सरकार के 15 मार्च को एक साल पूरा करने के साथ ही कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी के निर्देश पर कांग्रेस आक्रामक रुख अख्तियार करने जा रही है।
समाजवादी पार्टी के साथ अपने लगभग एक साल पुराने हनीमून का औपचारिक अंत करते हुए कांग्रेस 15 मार्च से सपा सरकार के खिलाफ प्रदेश व्यापी धरना प्रदर्शन शुरू करने जा रही है।
दरअसल, राहुल गांधी ने प्रदेश के नेताओं को कहा है कि वह नहीं चाहते कि लोकसभा चुनाव भी विधानसभा की तरह सपा-बसपा के बीच हो और कांग्रेस कहीं भी नजर में ही न आए।
उनका मकसद है कि पार्टी चुनावी जंग में प्रमुख खिलाड़ी की तरह लड़े, ताकि 2009 के लोकसभा चुनाव के नतीजे फिर से दोहराए जा सके। राहुल गांधी के भी इस अभियान में शामिल हो सकते हैं।
अखिलेश सरकार के पहले साल में कामकाज को लेकर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष निर्मल खत्री कहते हैं कि कानून व्यवस्था, आर्थिक विकास और सामाजिक समरसता के मुद्दे पर अखिलेश सरकार विफल साबित हुई है। पूरे एक साल में हर मोर्चे पर सरकार ने जनता को निराश किया है।
सूत्रों ने बताया कि पिछले हफ्ते अपने उत्तर प्रदेश दौरे के दौरान राहुल ने प्रदेश के नेताओं को चुनावी कार्यक्रम तेज करने के निर्देश दिए थे। कांग्रेस केंद्र में सपा के समर्थन के चक्कर में सूबे में अखिलेश सरकार के खिलाफ कोई बड़ा अभियान नहीं छेड़ पाई है।
प्रदेश से जुड़े कांग्रेस के कई बड़े नेता खुद मानते है कि सपा और कांग्रेस की आपसी साठगांठ के चक्कर में बसपा की मुख्य विपक्षी पार्टी के तौर पर भूमिका पहले से और ज्यादा मजबूत हुई है।
एससी एसटी आरक्षण हो या फिर सपा सरकार की कानून व्यवस्था का मसला बसपा ने सपा को हर मोर्चे पर तगड़ी चुनौती दी है। इसलिए कांग्रेस के सामने चुनौती बढ़ गई है। सपा पर पलटवार के साथ ही उसे बसपा को भी प्रमुख दौड़ से हटाना है।
कांग्रेस सूत्रों ने बताया कि पार्टी चाहती है कि लोकसभा चुनाव राष्ट्रीय मुद्दों पर हो और कांग्रेस बनाम सभी दलों के बीच जंग लड़ी जाएं। कांग्रेस प्रवक्ता राशिद अल्वी ने कहा कि प्रदेश में कानून का राज नहीं है। आपराधिक मामलों में सपा कार्यकर्ताओं का नाम आ रहा है।