मुजफ्फरनगर दंगों पर गरमाई सियासत के बीच उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने लखनऊ से दूर दिल्ली में आजम खां से मुलाकात की।
माना जा रहा है कि दंगों के बाद हुए सियासी नुकसान की भरपाई के लिए दोनों नेताओं के बीच मुलाकात हुई। अब आपसी मतभेद भुलाकर परिस्थितियों से निपटने के लिए एकजुट होकर आगे बढ़ने पर भी सहमति बनाने की बात है।
बैठक में पश्चिमी उत्तर प्रदेश में बने हालात की भी समीक्षा की गई। खासकर मुस्लिम समुदाय को भरोसे में लेने की दिशा पर भी बात हुई।
दंगों के बाद सूबे में बने हालात के बाद अब अखिलेश डैमेज कंट्रोल की कोशिश में जुट गए हैं। मुख्यमंत्री और आजम की यूपी सदन में हुई मुलाकात को इसी दिशा में एक कदम माना जा रहा है।
सूत्रों का कहना है कि सपा के अंदर अब आम सहमति बनाने की कोशिश की जा रही है। खासकर आपसी नाराजगी को दरकिनार किया जाए और सार्वजनिक रूप से एकजुट दिखने का संदेश दिया जाए।
दरअसल, दंगों के समय आजम खां सपा हाईकमान से नाराज माने जा रहे थे। मगर जिस तरह से दंगों की वजह से सपा विरोधी दलों के निशाने पर आई और एक टीवी चैनल के स्टिंग ऑपरेशन में आजम पर ही आरोप लगे।
साथ ही केंद्र सरकार और कांग्रेस ने जिस तरह से दंगों को लेकर कड़ा रुख अपना लिया है। उसे देखते हुए अब पार्टी के अंदर एकजुट होकर स्थितियों से निपटने की जरूरत महसूस की जा रही है।
सूत्रों ने बताया कि मुस्लिम वर्ग का विश्वास जीतने के लिए भी आने वाले दिनों में तमाम कदम उठाने की बात है।
सोमवार को प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में हुई राष्ट्रीय एकता परिषद की बैठक में भी अखिलेश ने मुस्लिमों के घावों पर मरहम लगाने की पुरजोर कोशिश की थी।
अखिलेश ने कहा था कि प्रदेश की 20 करोड़ आबादी में मुस्लिम समुदाय की जनसंख्या 18.5 फीसदी है। यानी कि हर पांच में से एक व्यक्ति मुस्लिम समुदाय का है।
अखिलेश ने कहा कि मुस्लिम समुदाय को विकास की मुख्य धारा से जोड़ना बहुत जरूरी है। मुस्लिम समुदाय की सामाजिक और आर्थिक स्थिति के बारे में सच्चर कमेटी की रिपोर्ट को केंद्र सरकार से जल्द लागू करने की मांग की।
साथ ही उन्होंने केंद्र से मुस्लिम समुदाय के लिए आरक्षण की मांग की। उन्होंने कहा कि कई जगह मुस्लिम समुदाय की स्थिति अनुसूचित जाति और जनजातियों से भी बदतर है।