आतंकी संगठनों में वर्चस्व की जंग से जम्मू-कश्मीर में हमले बढ़े हैं। आतंकी संगठनों में शामिल शिक्षित कश्मीरी युवकों ने अब नया संगठन बना लिया है जिसे लश्कर-ए-ताइबा ने साधन मुहैया कराना शुरू कर दिया है।
वहीं हिजबुल मुजाहिदीन ने इस नए संगठन से नाता तोड़ लिया है। आतंकियों ने नए पैंतरों के बाद कश्मीर दौरे पर गए राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल ने दिल्ली लौटकर केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह से विस्तृत चर्चा की है।
सेना और बीएसएफ की मुस्तैदी के बाद पाकिस्तान से आतंकियों की घुसपैठ कम होने के बाद अब स्थानीय शिक्षित युवकों का भटकाव सुरक्षा बलों के लिए नया सिरदर्द बन गया है।
सूत्रों के मुताबिक, यह महज संयोग नहीं है कि हिजबुल मुजाहिदीन के आतंकी अब्दुल कयूम नजर को संगठन से बाहर निकालने के 24 घंटे के अंदर श्रीनगर में मोबाइल प्रतिष्ठानों पर ताबड़तोड़ तीन हमले हुए।
हिजबुल मुजाहिदीन ने लश्कर-ए-इस्लाम से नाता तोड़ा
दरअसल, कयूम नजर ने लश्कर-ए-इस्लाम के नाम से नया संगठन बना लिया है। इस आतंकी संगठन में अधिकांश कश्मीरी युवक ही हैं। लश्कर-ए-ताइबा ने इस नए संगठन को साधन मुहैया कराना शुरू कर दिया है।
इससे पहले लश्कर-ए-ताइबा ने अल नसरीन, शोहादा ब्रिगेड और फरजंदन-ए-मिल्लत के नाम से तीन अलग-अलग संगठन बनाए थे। इन संगठनों में कश्मीरी युवकों की संख्या कम ही थी। अधिकांश पाकिस्तानी आतंकी ही उन संगठनों के नाम से आतंकी कारनामों को अंजाम देते रहे।
लश्कर-ए-इस्लाम के तार लश्कर-ए-ताइबा से जुड़ने के बाद हिजबुल मुजाहिदीन के सुप्रीम कमांडर सैयद सलाहुद्दीन ने कयूम नजर को बर्खास्त कर दिया। इस बर्खास्तगी के बारे में हिजबुल के प्रवक्ता सलीम हाशिमी ने बकायदा बयान जारी किया है।
आतंकियों की बदली रणनीति
सूत्रों के मुताबिक, लश्कर-ए-इस्लाम में फिलहाल लगभग एक दर्जन शिक्षित कश्मीरी युवक हैं। सुरक्षा एजेंसियों के पास इनमें से सिर्फ छह के ही नाम हैं। एजेंसियों ने पिछले दिनों बारामूला के दलीना में लश्कर-ए-इस्लाम के कमांडर कयूम नजर को घेर लिया था लेकिन वह भागने में सफल रहा।
इसके बाद फिर से मोबाइल प्रतिष्ठानों पर हमले बढ़े हैं। हमले का तरीका उत्तरी कश्मीर के हमलों जैसा ही है। नया संगठन पंचों-सरपंचों, सेवानिवृत्त पुलिस अफसरों, मोबाइल प्रतिष्ठानों जैसे साफ्ट टारगेट को निशाना बना रहा है।
पाकिस्तानी झंडे लहराने में भी इन भटके युवकों को ही जिम्मेदार माना जा रहा है। इन हमलों में स्थानीय लोग सीधे प्रभावित हो रहे हैं। यह आतंकियों की बदली रणनीति है।