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ट्रामा का ड्रामा: चौथी बार भी नहीं हो सका उद्घाटन

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एक बार फिर ट्रामा सेंटर का उद्घाटन नहीं कर पाए। प्रधानमंत्री को गुरुवार को वाराणसी को दौरा करना था, लेकिन एक मजदूर की मौत के कारण उन्हें ये दौरा रद्द करना पड़ा।
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वाराणसी में गुरुवार की रात से ही बारिश हो रही थी, जिससे दौरे के होने ये न होने को लेकर सवाल उठ रहा थे। पखवाड़े भर पहले 28 जून को भी मोदी का दौरा बारिश के कारण ही रद्द हुआ था। हालांकि इन्हीं आशंकाओं के बीच खबर आई कि मोदी के कार्यक्रम के लिए मंच सजा रहे मजदूर देवनाथ मन्ना की करंट लगने से मौत हो गई।

इस दुर्घटना के बाद ही मोदी का दौरा रद्द कर दिया गया। दौरा रद्द होने के कारण बीएचयू ट्रॉमा सेंटर का उद्घाटन भी एक बार फिर टल गया।

चौथी बार मोदी नहीं कर पाए ट्रॉमा सेंटर का उद्घाटन

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी चौथी बार बीएचयू के ट्रॉमा सेंटर का उद्घाटन करने से वंचित रह गए। इससे पहले 14 अक्टूबर 2014 को हुदहुद चक्रवाती तूफान के कारण, 25 दिसंबर 2014 को महामना मदन मोहन मालवीय की जयंती पर और तीसरी बार 28 जून 2015 को भारी बारिश के कारण ट्रॉमा सेंटर के उद्घाटन का कार्यक्रम टल चुका है।

इस बार 16 जुलाई 2015 को मंच की सजावट कर रहे माली की मौत और भारी बारिश के कारण चौथी बार यह कार्यक्रम स्थगित हो गया। इससे पहले एक बार पूर्व पीएम मनमोहन सिंह और राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी भी किसी न किसी कारण से इसका उद्घाटन नहीं कर पाए थे।

महत्वपूर्ण परियोजना का करना था शुभारंभ

आपको बता दें की करीब 197 करोड़ रुपये की लागत से बनें इस ट्रामा सेंटर में अत्याधुनिक सुविधाएं उपलब्ध हैं। ट्रॉमा सेंटर के ऑपरेशन थियेटर में रोबोट मशीनों के प्रयोग को लेकर भी बात चल रहा है।

इस बार मोदी के कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए पानी की तरफ पैसा बहाया गया लेकिन उसका कोई लाभ नहीं हुआ। हालांकि, मोदी को अपने इस दौरे के दौरान करीब 1800 करोड़ रुपये लागत के कई अन्य महत्वपूर्ण परियोजनाओं का शुभारंभ भी करना था।

इन परियोजनाओं में ग्रामीण क्षेत्रों में विद्युत वितरण प्रणाली के सुधार पर 931.43 करोड़ रुपये और कचहरी-बाबतपुर फोर लेन योजना के तहत 450 करोड़ रुपये शामिल थे। इसके अलावा इंटीग्रेटेड पावर डेवलपमेंट स्कीम (आईपीडीएस) का भी शुभारंभ करना था।
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महामना ने भी छोड़ दिया था इस जमीन को

बीएचयू में करीब 197 करोड़ रुपये की लागत से बने ट्रॉमा सेंटर के उद्घाटन में हो रही देरी को लेकर भी स्‍थानीय लोगों के बीच कई तरह की बातें की जा रही हैं। वाराणसी में जिस जमीन पर ट्रॉमा सेंटर का निर्माण किया गया है, वहीं BHU स्‍थापना स्‍थल के रूप में जानी जाती है।

बीएचयू की नींव वहीं पड़ी थी, लेकिन किन्ही कारणों से विश्वविद्यालय के संस्‍थापक महामना मदन मोहन मालवीय ने वहां कोई निर्माण नहीं कराया। उन्होंने वह जमीन खाली छोड़ दी। बीएचयू प्रशासन ने भी लंबे समय तक वहां कोई निर्माण नहीं कराया।

इस वजह से स्‍थानीय लोगों में उस जमीन को लेकर तरह-तरह की मान्यताएं हैं। हालांकि बीएचयू प्रशासन द्वारा उस जमीन को छोड़े जाने का एक कारण बाढ़ भी माना जाता है। बाढ़ के दिनों में अक्सर ये जगह गंगा के पानी में डूब जाती है।
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