लोजपा प्रमुख रामविलास पासवान को अपने पाले में लाने में कामयाब रही भाजपा को अब एनडीए का कुनबा बढ़ने की उम्मीद बंधी है। पार्टी की नजर अब तेलगूदेशम पार्टी प्रमुख चंद्रबाबू नायडू और असम गण परिषद पर है।
पूर्वोत्तर के नेता पीए संगमा एक बार फिर एनडीए के साथ आ सकते हैं। जबकि हरियाणा में ओम प्रकाश चौटाला की इंडियन नेशनल लोकदल को लेकर पार्टी में दुविधा कायम है।
पासवान के एनडीए के साथ खड़े होने से भाजपा यह संदेश देने में सफल रही है कि नरेंद्र मोदी अब राजनीतिक तौर पर ‘अछूत’ नहीं रह गए हैं।
डीएमके ने भी दिखाई मोदी पर 'करुणा'
राज्यसभा में विपक्ष के नेता अरुण जेटली ने कहा कि मोदी को जब प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित किया गया था तो राजनीतिक पर्यवेक्षकों की प्रतिक्रिया थी कि भाजपा राजनीतिक तौर पर अलग-थलग पड़ जाएगी। उसे सहयोगी दल नहीं मिलेंगे, लेकिन यह आकलन गलत साबित हो गया है।
बहरहाल, भाजपा का आकलन है कि पासवान से बिहार में भले ही ज्यादा सियासी लाभ न हो, लेकिन देशभर में इसका सकारात्मक संदेश गया है।
पार्टी नेता प्रकाश जावडे़कर डीएमके प्रमुख व तमिलनाडु के पूर्व मुख्यमंत्री एम करुणानिधि के उस बयान का हवाला देते हैं जिसमें उन्होंने मोदी को अच्छा मित्र और परिश्रमी बताकर उनकी तारीफ की है।
आसमान पर भाजपा की उम्मीदें!
इससे भाजपा को अब 2004 तक एनडीए के सहयोगी रहे दलों के लौट आने की उम्मीद तेज हो गई है। पार्टी का यह भी आकलन है कि लोकसभा चुनाव में 200 का आंकड़ा पार करते ही भाजपा को सहयोगियों की कमी नहीं रहेगी।
बहरहाल, उत्तर प्रदेश में कल्याण सिंह, कर्नाटक में वीएस येदियुरप्पा और गुजरात में केशुभाई पटेल पहले ही भाजपा में लौट आए है। पार्टी का एक वर्ग चाहता है कि झारखंड विकास मोर्चा प्रमुख बाबूलाल मरांडी भी भाजपा में लौट आएं।
उत्तर प्रदेश और बिहार में पार्टी छोटे-छोटे दलों को पहले ही गले लगा चुकी है।