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माई नेम इज इकबाल, आई एम नॉट ए टेररिस्ट

Sun, 12 May 2013 01:53 AM IST
नई दिल्ली/एजेंसी
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सात साल पहले जम्मू-कश्मीर से दिल्ली अपनी शादी की शॉपिंग करने आए मोहम्मद इकबाल जान को यह नहीं पता था कि उनको शादी के लिए सात सालों तक इंतजार करना होगा।
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वहीं जम्मू-कश्मीर में इकबाल की मंगेतर को पूरा विश्वास था कि वह एक दिन जरूर आएंगे और उनका यह विश्वास तब पक्का हो गया जब दिल्ली हाईकोर्ट ने इकबाल पर लगे सभी आरोपों को खारिज करते हुए उसे बरी कर दिया।

इकबाल को वर्ष 2006 में दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने आतंकवाद फैलाने, विस्फोटक लाने और गैर कानून गतिविधियों में लिप्तता के आरोप में गिरफ्तार किया था

इसके बाद निचली अदालत ने भी इकबाल और उसके साथी मुस्ताक अहमद कल्लू को इसका दोषी पाते हुए सजा सुनाई थी।

इकबाल के पारिवारिक मित्र जलीन सूफी ने बताया कि वह कोर्ट की हर तारीख पर रिहा होने की उम्मीद रखता था और ऐसे करते-करते उसके सात साल जेल में बीत गए लेकिन उसकी जेल से छूटने की उम्मीद कम नहीं हुई।
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यही वजह थी कि इकबाल की मंगेतर ने भी उससे वादा किया था कि वह उसका अपनी जिंदगी के खत्म होने तक इंतजार करूंगी।

इकबाल एक गैस एजेंसी का मालिक और जम्मू कश्मीर नेशनल पैंथर पार्टी का जिला अध्यक्ष भी था।

इकबाल के वकील ने बताया कि इकबाल की तिहाड़ में तबीयत खराब होने के बाद उसे तिहाड़ से श्रीनगर जेल में शिफ्ट कर दिया गया था।

वहीं इस मामले में गिरफ्तार दूसरे शख्स मुस्ताक अहमद की जिंदगी पूरी तरह बदल गई।

गिरफ्तार के बाद उसका जूतों का कारोबार बंद हो गया और उसके एक साल बाद उसकी पत्नी ने दूसरा निकाह कर लिया जिससे उसके परिवार को मुस्ताक के पांच महीने के बेटे को पालने के लिए परिवार को संघर्ष करना पड़ा।
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इस हादसे के बाद से मुस्ताक का परिवार इतना डर गया था कि वह इन सात सालों में कभी भी उससे मिलने के दिल्ली नहीं आया।
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