भारत के पूर्वोत्तर में बसा असम अब भारत के टाइम टेबल से अलग अब अंग्रेजों के बनाए टाइम को मानने जा रहा है। असम के मुख्यमंत्री तरुण गोगोई ने फैसला किया है कि असम में घड़ी को भारत में चलने वाली घड़ियों से एक घंटा आगे कर दिया जाए। अंग्रेज इसे 'चायबागान टाइम' कहा करते थे।
हिंदुस्तान टाइम्स की खबर के अनुसार सीएम गोगाई ने कहा कि वह कई बार इसको लेकर दिल्ली से बात कर चुके हैं कि हम पूर्वोत्तर भारत वालों के लिए अलग टाइम बनाया जाए। अब हमने निर्णय लिया है कि हम चाय बागान में काम करने वाले कामगारों के लिए अपनी घंड़ी एक घंटा आगे कर देंगे।
हालांकि उन्होंने यह नहीं बताया कि उन्हें केंद्र सरकार से ऐसा करने की मंजूरी मिल गई है या नहीं।
चायबागान या बागान टाइम भारत के आईएसटी टाइम से एक घंटा आगे काम करती है। असम में कई चाय बागान अब भी बागान टाइम को फॉलो करते हैं।
1 सितंबर 1947 को भारतीय मानक समय या आईएसटी की व्यवस्था की गई थी। उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर में स्थित 82.5 डिग्री पूर्व देशांतर से इसको माना गया है।
बागान टाइम की पैरवी करने वाले लोगों का कहना है कि इससे पूर्वोत्तर राज्यों के कामगारों की उत्पादकता बढ़ेगी।
केंद्र द्वारा संचालित साइंस एंड टेक्नालॉजी डिपार्टमेंट ने भारत में दो समय का अध्ययन कर 2007 में इस विचार को ठुकरा दिया था।