गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्वतंत्रता दिवस पर प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह पर हमला बोला था। इसके बाद पूरी भाजपा मोदी के साथ खड़ी हो गई है।
ऐसे में इस मामले में मोदी की आलोचना कर पार्टी के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी एक बार फिर पार्टी में अलग-थलग पड़ गए हैं।
पार्टी ने आडवाणी से किनारा कर उनकी आलोचना के बहाने हमला करने वाली कांग्रेस पर जवाबी और तीखा हमला बोल दिया है।
पार्टी ने यह कह कर मोदी की आलोचना को सही ठहराया है कि प्रधानमंत्री का लालकिला पर दिया गया भाषण कोई धार्मिक प्रवचन नहीं था कि उसकी आलोचना न हो सके।
पार्टी ने उस वाकये की भी याद दिलाई है जब तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के झंडारोहण के दौरान लड़खड़ा जाने पर कांग्रेस ने तंज कसा था।
स्वतंत्रता दिवस पर प्रधानमंत्री पर हमला और उनके भाषण की तीखी आलोचना पर शुक्रवार को भाजपा और कांग्रेस के बीच जुबानी जंग और तीखी हो गई।
पार्टी उपाध्यक्ष मुख्तार अब्बास नकवी ने मोदी की ओर से पीएम के भाषण की आलोचना को जायज करार देते हुए कहा कि प्रधानमंत्री लालकिला पर धार्मिक प्रवचन नहीं दे रहे थे कि उसकी आलोचना नहीं हो सकती।
नकवी ने कहा कि यह वही कांग्रेस है जिसने तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के लालकिले के सामने लड़खड़ा जाने पर ताना मारते हुए कहा था कि जो पीएम ठीक से चल नहीं सकता वो देश को क्या चलाएगा।
पार्टी प्रवक्ता निर्मला सीतारमन ने भी प्रधानमंत्री पर हमले को जायज ठहराया है। उधर, इस जुबानी जंग के बीच राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने चुप्पी साध ली है।
उधर, भाजपा के कई वरिष्ठ नेता दबी जुबान में आडवाणी की आलोचना को जायज ठहरा रहे हैं। इन नेताओं का तर्क है कि अब तक की परंपरा स्वतंत्रता दिवस के बाद ही पीएम के भाषण की आलोचना करने की रही है।
आजादी के बाद से अब तक भाषण के अगले दिन पीएम के भाषण की आलोचना हुई भी है। मगर मोदी ने उसी दिन प्रधानमंत्री पर हमला बोल कर इस परंपरा को खत्म कर दिया है।