मुंबई बम धमाकों के गुनहगार याकूब मेमन को फांसी के बाद उसके शव को मुंबई लाया गया। जहां बड़ा कब्रिस्तान में उसका अंतिम संस्कार किया गया।
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1993 में हुए मुंबई बम धमाकों के गुनहगार याकूब मेमन को सुबह 7 बजे फांसी पर लटकाया गया। 2007 में टाडा अदालत ने याकूब मेमन को मौत की सजा सुनाई थी। सजा पर अमल के साथ ही कई सालों से चल रही लंबी कानूनी प्रकिया का अंत हो गया।
मुंबई में 12 मार्च, 1993 में हुए बम धमाकों के आरोप में याकूब को 1994 में दिल्ली से गिरफ्तार किया गया था। 27 जुलाई 2007 को विशेष टाडा कोर्ट के जज पीडी कोडे ने याकूब मेमन सहित अन्य 11 लोगों को फांसी की सजा सुनाई। हालांकि ऊपरी अदालतों में चले मुकदमों में अन्य आरोपियों की सजा बदलती गई, जबकि याकूब की सजा-ए-मौत बरकरार रही।
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गुरुवार को फांसी पर चढ़ाए जाने से पहले भी याकूब के परिजनों समेत मानवाधिकार संगठनों और वकीलों ने उसे बचाने की भरपूर कोशिश की। समाचार एजेंसी एएनआई के मुताबिक याकूब को नागपुर सेंट्रल जेल में सुबह 7 बजे फांसी दी गई, जबकि पहले खबर आई थी कि उसे 6 बजकर 19 मिनट पर फांसी पर लटकाया गया।
मुंबई और नागपुर में कड़े सुरक्षा इंतजाम
याकूब को फांसी देने की प्रक्रिया 7 बजे शुरु हुई और 7 बजकर 10 मिनट पर खत्म हो गई। फांसी के बाद शव का पोस्टमॉर्टम किया गया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। याकूब का शव उसके भाइयों सुलेमान मेमन और उस्मान मेमन को सौंप दिया गया। ये दोनों भाई पिछली रात से नागपुर में ही रुके हुए थे।
विमान से याकूब मेमन का शव मुंबई लाया गया। मामले की संवेदनशीलत के मद्देनजर मुंबई में भी पुलिस ने कड़े सुरक्षा प्रबंध किए हैं। बीबीसी हिंदी के मुताबिक, मुंबई में संवेदनशील इलाकों में 35,000 पुलिसकर्मी और अधिकारी तैनात हैं। पुलिस प्रशासन ने आज सारी छुट्टियां रद्द कर दी हैं।
बुधवार शाम महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेन्द्र फडणवीस ने राज्य के पुलिस महानिदेशक संजीव दयाल तथा मुंबई के पुलिस कमिश्नर राकेश मारिया के साथ बैठक कर सुरक्षा इंतजामों का जायजा लिया था। मुंबई के संवेदनशील इलाकों जैसे भायखला, नागपाड़ा, डोंगरी, बांद्रा में विशेष बंदोबस्त किया गया है।
मुंबई के बड़ा कब्रिस्तान में हुआ याकूब का अंतिम संस्कार
फांसी के बाद मेमन का शव माहिम स्थिति आवास पर पहुंचा। जहां से उसे बड़ा कब्रिस्तान ले जाया गया। बड़ा कब्रिस्तान में याकूब का अंतिम संस्कार किया गया।
इस दौरान भारी संख्या में पुलिस की तैनाती की गई थी। मुंबई पुलिस कमिश्नर ने भी माहिम का दौरा किया था।
इससे पहले याकूब के शव की फोटोग्राफी और वीडियोग्राफी पर भी रोक लगा दी गई थी। पुलिस ने एहतियातन 300 लोगों को हिरासत में भी ले लिया। माहिम में फिलहाल कर्फ्यू जैसे हालात हैं।
राष्ट्रपति ने खारिज कर दी याकूब की दया याचिका
इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने फांसी से करीब 5 घंटे पहले याकूब के बचाव के लिए दायर की गई आखिरी याचिका भी खारिज कर दी। सर्वोच्च अदालत ने याकूब की याचिका उसकी फांसी से महज 2 घंटे पहले खारिज की। ऐसा पहली बार हुआ जब किसी केस में रात 2.30 बजे सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई हो।
पूरा मामला उस समय गरमाया जब बुधवार रात करीब 10 बजे राष्ट्रपति ने याकूब की दया याचिका खारिज कर दी, जिसके तुरंत बाद वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण की अगुवाई में याकूब के वकील सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश एचएल दत्तु से मिलने उनके आवास पर पहुंच गए। उन्होंने मुख्य न्यायाधीश से याकूब की फांसी टालने की अपील की।
याकूब मेमन के वकीलों ने महाराष्ट्र के राज्यपाल सी.वी राव द्वारा दया याचिका खारिज करने के बाद देर रात सुप्रीम कोर्ट में ये अपील दाखिल की। फांसी रुकवाने के पीछे मेमन के वकीलों ने कई तर्क दिए थे। उनके मुताबिक राष्ट्रपति के द्वारा याचिका खारिज करने के बाद फांसी देने के लिए 14 दिनों का वक्त होता है, जो इस मामले में नहीं हो रहा है।
याकूब मेमन के वकीलों ने अपनी अपील में सुप्रीम कोर्ट से 14 दिनों तक याकूब की फांसी पर रोक लगाने की मांग की थी। उनके मुताबिक याकूब मानसिक रूप से बीमार है। ऐसे में आज होने वाली याकूब की फांसी को फिलहाल टाल दिया जाए।
सीजेआई एचएल दत्तू के घर पहुंचने वाले वकीलों में वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण,नित्या रामकृष्णन, युग चौधरी और आनंद ग्रोवर शामिल थे। उनकी अपील को माना गया और सुप्रीम कोर्ट में पहली बार रात 2 बजे के बाद सुनवाई हुई।
रात करीब ढाई बजे सुनवाई शुरू हुई जिसमें याकूब के वकील ने उसे बचाने के लिए जमकर दलीलें दीं। लेकिन सरकारी वकील मुकुल रोहतगी के तर्कों ने पूरे मामले को एकतरफा कर दिया।
सुबह करीब 5 बजे सुनवाई पूरी हुई और कोर्ट के न्यायाधीश दीपक मिश्रा ने अपना फैसला सुनाते हुए याचिका को फांसी की सजा से महज दो घंटे पहले खारिज कर दिया।
जस्टिस दीपक मिश्रा ने याचिका को खारिज करते हुए साफ तौर से कहा कि अपील में कुछ भी नया नहीं है। उन्होंने कहा कि किसी भी रिव्यू पिटिशन पर महज आधे घंटे की सुनवाई होती है। लेकिन इस मामले में पिछले 10 दिन से सुनवाई चल रही है। इसके साथ ही याकूब की फांसी का रास्ता साफ हो गया।