नरेंद्र मोदी को 2014 लोकसभा चुनावों में प्रचार अभियान की कमान सौंपे जाने के मुद्दे पर मचे घमासान के बीच गोवा में भाजपा की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक शुरु हो गई है।
पार्टी के इतिहास में शायद ये पहली बार है कि वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में शामिल नहीं हैं। राष्ट्रीय कार्यकारिणी में शामिल न होने वालों में यशवंत सिन्हा और बीसी खंडूरी का नाम भी जुड़ गया है।
उल्लेखनीय है कि अस्वस्थ होने के कारण लालकृष्ण आडवाणी के अलावा जसवंत सिंह, शत्रुघ्न सिन्हा, और उमा भारती ने भी राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में भाग नहीं लिया है।
ये नेता शुक्रवार को बुलाई गई पार्टी पदाधिकारियों की बैठक में भी शामिल नहीं थे। राजनाथ सिंह ने ये बैठक कार्यकारिणी का एजेंडा तय करने के लिए बुलाई थी।
भाजपा में कितने अटल बिहारी?
माना जा रहा है कि आडवाणी खेमा नरेंद्र मोदी को चुनाव प्रचार समिति का अध्यक्ष बनाए जाने का विरोध कर रहा है, इसलिए उसने कार्यकारिणी की बैठक से दूर रहना है मुनासिब समझा है।
विस्तारित संसदीय बोर्ड की बैठक
राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक से पहले शुक्रवार को पार्टी की विस्तारित संसदीय बोर्ड की बैठक रखी गई थी। अचानक बीमार होने के कारण आडवाणी समेत उनके खेमे के कई नेता बैठक से गायब रहे।
आडवाणी खेमे की गैरमौजूदगी से भाजपा की अंदरूनी खींचतान खुलकर सामने आ गई और मोदी के सवाल पर पार्टी दो खेमों में बंटती नजर आई।
अंतर्कलह में मोदी ही जीतेंगे
हालांकि, पार्टी अध्यक्ष राजनाथ सिंह ने दलील दी कि आडवाणी बीमार हैं और उन्होंने ही आराम करने की सलाह दी थी। राजनाथ ने कहा था कि आडवाणी शनिवार को राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में शामिल होंगे। लेकिन टीवी चैनलों के मुताबिक, आडवाणी आज भी गोवा नहीं जा रहे हैं।
मोदी की राह रोकने की कोशिश
आडवाणी की ‘बीमारी’ को मोदी की राह रोकने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है। हालांकि मोदी समर्थक अब आडवाणी के सामने झुकने को तैयार नहीं दिख रहे हैं।
पार्टी अध्यक्ष राजनाथ सिंह समेत पार्टी का बड़ा वर्ग मोदी के साथ खड़ा है और उन्हें हर हालत में चुनाव अभियान समिति की कमान सौंपने के पक्ष में है।
इसलिए अब आगामी दो दिनों में भाजपा का यह विवाद और तेज होने की आशंका है।