भारतीय जनता पार्टी ने राष्ट्रीय अध्यक्ष के चुनाव की अधिसूचना जारी कर दी है। अधिसूचना के मुताबिक इस महीने की 23 तारीख को उम्मीदवारों का नामांकन भरा जाएगा और 24 को चुनाव होंगे। लेकिन पार्टी के भीतर वर्तमान अध्यक्ष नितिन गडकरी को दूसरा कार्यकाल देने पर बन चुकी सहमति ने साफ कर दिया है कि चुनाव सिर्फ औपचारिकता है।
पार्टी के उच्च पदस्थ सूत्रों ने बताया कि वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी ने गडकरी पर कोर कमेटी और आरएसएस की सहमति को देखते हुए अपना विरोध वापस ले लिया है। सूत्र के मुताबिक अध्यक्ष पद के लिए आडवाणी की पसंद रहीं सुषमा स्वराज ने खुद गडकरी के नाम पर सहमति जताई है।
सुषमा के अलावा कोर कमेटी के राजनाथ सिंह और अनंत कुमार भी गडकरी को ही अगला अध्यक्ष बनाने पर सहमत हैं। उधर पूर्ति समूह में गड़बड़ी और गडकरी के खिलाफ उजागर हुए कथित भ्रष्टाचार के मामलों के बावजूद आरएसएस ने उन्हें ही अपनी पसंद बताया है।
पार्टी के वरिष्ठ नेता ने इस बात को खारिज कर दिया कि अध्यक्ष पद के लिए सुषमा के अलावा राज्यसभा में विपक्ष के उपनेता रविशंकर प्रसाद और गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी के नाम का भी प्रस्ताव रखा गया है।
सूत्र के मुताबिक सुषमा अपने को प्रधानमंत्री पद की उम्मीदवारी के लिए बचा कर रखना चाह रही हैं। यही वजह है कि उन्होंने शुरू में ही अध्यक्ष पद के लिए आडवाणी की ओर से आए न्योते को ठुकरा दिया था। उस वक्त आडवाणी ने साफ कर दिया था कि घोटाले के आरोपों के चलने वह गडकरी को पार्टी की कमान सौंपने के पक्ष में नहीं हैं।
दरअसल पार्टी संविधान के अनुसार 50 फीसदी राज्यों में प्रदेश अध्यक्ष का चुनाव हो जाने के बाद राष्ट्रीय अध्यक्ष का चुनाव होना जरूरी हो गया है।
अब तक उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, असम, जम्मू-कश्मीर, त्रिपुरा, सिक्किम, पड्डुचेरी, मणिपुर, लक्षद्वीप, दादर व नागर हवेली, हरियाणा, पंजाब, चंडीगढ़, तमिलनाडु व अंडमान निकोबार को नए अध्यक्ष मिल चुके हैं। दिल्ली, राजस्थान, हिमाचल प्रदेश, गुजरात आदि राज्यों में राष्ट्रीय अध्यक्ष चुने जाने के बाद ही संगठन के चुनाव पूरे होंगे। जबकि उत्तराखंड को लेकर दुविधा की स्थिति बनी है।