आपत्तिजनक बयानों की बाढ़ से उपजे विवाद से आजिज प्रधानमंत्री ने मंगलवार को एक बार फिर से बड़बोले सांसदों-नेताओं को लक्ष्मण रेखा पार न करने की चेतावनी दी है। पार्टी के ससंदीय दल को संबोधित करते हुए पीएम ने दो टूक शब्दों में कहा कि सुशासन के माध्यम से विकास ही इस सरकार को पहला और आखिरी एजेंडा है। इस एजेंडे से किसी को न तो भटकने या बहकने की किसी कीमत पर इजाजत नहीं दी जाएगी।
पीएम ने सांसदों का मीडिया से बढ़ते प्रेम के प्रति भी यह कह कर आगाह किया कि मीडिया की बनाने से ज्यादा बिगाड़ने में भूमिका होती है। उल्लेखनीय है कि पीएम ने दो हफ्ते पूर्व भी सांसदों को राष्ट्र के नाम संदेश न देने की नसीहत दी थी।
इसके बावजूद साक्षी महाराज ने जहां नाथूराम गोडसे को राष्ट्रभक्त बता कर विवाद खड़ा किया, वहीं महंत आदित्यनाथ ने घर वापसी कार्यक्रम की सार्वजनिक रूप से जम कर वकालत कर विपक्ष को हमले का मौका दिया। बैठक की खास बात यह रही है कि समय पर पहुंचने की बार-बार दी गई नसीहत के बावजूद 22 सांसद और 4 मंत्री देर से पहुंचे। इस दौरान मोदी ने पीछे की पंक्ति में बैठे सांसदों को आगे बैठाया और कहा कि राजनीति में पीछे बैठने वाले पीछे छूट जाते हैं।
मोदी की नसीहत की अवहेलना
बैठक में मोदी ने सांसदों के लिए एक बार फिर से नसीहतों की झड़ी लगा दी। उन्होंने सांसदों को आगाह करते हुए कहा कि किसी को भी सरकार के सुशासन के माध्यम से विकास के एजेंडे को पटरी से उतारने की इजाजत नहीं दी जाएगी। उन्होंने कहा कि सांसद बेवजह की बयानबाजी की जगह तथ्यों पर ध्यान दें।
बयानबाजी से विपक्ष को सरकार पर हमला करने और लोगों को गुमराह करने का मौका न दें। पीएम ने इस दौरान विकास और सुशासन का अर्थ भी समझाया। उन्होंने कहा कि स्कूल, सड़क, बस स्टैंड बनाना विकास हो सकता है। मगर सुशासन का अर्थ बनाए गए स्कूल में नियमित पढ़ाई सुनिश्चित करना, सड़क पर नियत समय पर बस का आना सुनिश्चित करना है। इस दौरान वित्त मंत्री अरुण जेटली ने सरकार के आर्थिक बिल के संबंध में जानकारी दी।
दो घंटे बाद ही लांघी लक्ष्मण रेखा
पीएम मोदी की लक्ष्मण रेखा न लांघने की नसीहत का असर दो घंटे भी नहीं रह पाया। सांसद महंत आदित्यनाथ ने संसद भवन परिसर में एक बार फिर से घर वापसी कार्यक्रम की वकालत की। उन्होंने कहा कि हिंदुत्व की बात करना गलत नहीं है। घर वापसी का कार्यक्रम पहले भी हुआ है और आगे भी जारी रहेगा।
गडकरी के कारण नहीं पड़ी डांट
केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी गडकरी के कारण बैठक स्थल में देर से पहुंचने वालों ने राहत की सांस ली। उल्लेखनीय है कि चेतावनी के बावजूद 22 सांसद और 4 मंत्री देर से पहुंचे। चूंकि देर से पहुंचने वालों में गडकरी और केंद्रीय राज्य मंत्री राव इंद्रजीत सिंह भी शामिल थे। इसलिए इस मुद्दे पर पीएम ने चुप्पी साध ली। पिछली बैठक में मोदी ने देर से पहुंचने वालों के लिए बैठक का दरवाजा बंद करने की चेतावनी दी थी।
सरकार की मुश्किल के पीछे विहिप
संसद के शीतकालीन सत्र में विवादित बोल से सरकार को कटघरे में खड़ा करने वाले सांसदों का विश्व हिंदू परिषद (विहिप) से गहरा नाता है। चाहे साक्षी महाराज हों या महंत आदित्यनाथ या फिर स्वामी चिन्मयानंद। ये सभी विहिप के ‘घर वापसी’ कार्यक्रम के प्रबल समर्थक हैं। विहिप खुद भी तमाम विवाद के बावजूद इस कार्यक्रम को सियासी हलके में गरमाए रखना चाहता है। सरकार को आशंका है कि विहिप अपने एजेंडे के लिए इन सांसदों के जरिए सरकार के सुशासन और विकास के एजेंडे को पटरी से उतारना चाहता है।
चूंकि श्रम सुधारों पर नई सरकार ने संघ परिवार के अनुषांगिक संगठनों भारतीय मजदूर संघ और स्वदेशी जागरण मंच के सुझावों और ऐतराजों की परवाह नहीं की है। इसलिए ये संगठन इस मामले में विहिप के साथ खड़े हैं। वैसे भी पीएम नरेंद्र मोदी के गुजरात का सीएम रहते राज्य सरकार और विहिप के बीच हमेशा छत्तीस का आंकड़ा रहा था। बताते हैं कि पीएम मोदी ने संघ प्रमुख मोहन भागवत के समक्ष भी विहिप के रवैये पर चिंता जाहिर की है।
भाजपा सूत्रों का कहना है कि पीएम संसदीय दल की बैठक में दिए अपने भाषण में भगवा ब्रिगेड की सरकार के विकास के एजेंडे को पटरी से उतारने की कोशिशों की ओर इशारा कर चुके हैं। सरकार के एक मंत्री ने पीएम की ओर से बार-बार चेतावनी दिए जाने के बावजूद आपत्तिजनक बयान जारी रहने पर गहरी चिंता जताई है। मंत्री ने कहा है कि सरकार और संगठन में ‘बेरोजगार’ चल रहे विहिप के करीबी नेता सरकार के विकास के एजेंडे को पटरी से उतारना चाहते हैं। दरअसल इन नेताओं की राज्य या केंद्रीय संगठन में पूछ नहीं हो रही। इनका मंत्री बनने का सपना भी पूरा नहीं हो रहा। यही कारण है कि इस पूरे अभियान में यह ब्रिगेड विहिप के साथ खड़ा हो गया है।