महंत आदित्यनाथ ने सोमवार को संसद के शून्य पहर में गीता का मुद्दा उठाते हुए कहा कि श्रीमद्भागवत गीता को राष्ट्रीय ग्रंथ घोषित किया जाए। साथ ही इसे विद्यालयीय शिक्षा तथा विश्वविद्यालय के पाठ्यक्रम का भी हिस्सा अनिवार्य रूप से बनाया जाए।
सांसद ने लोकसभा में कहा कि श्रीमद्भागवत गीता एक सर्वकालिक एवं सार्वभौमिक ग्रंथ है। यह किसी पंथ उपासना विधि, मत अथवा मजहब के प्रति किसी को आग्रही नहीं बनाता है।
यह बिना किसी राग-द्वेष के निष्काम कर्म की प्रेरणा प्रदान करने तथा संपूर्ण मानवता के कल्याण का मार्ग प्रशस्त करने वाला ग्रंथ है। इस पर मनुष्य मात्र का अधिकार है। वह चाहे किसी भी वर्ण आश्रम में स्थित हो तथा किसी भी मत का अनुयायी क्यों न हो, पर उसके अंदर श्रद्धायुक्त भक्ति होनी चाहिए। यही सृष्टि के आदि वेद ग्रंथों का सार है।