आदर्श हाउसिंग सोसाइटी के पास जरूरी पर्यावरणीय मंजूरी नहीं थी, महाराष्ट्र सरकार द्वारा पहली बार यह स्वीकार करने के साथ ही इस घोटाले में दो साल से चल रही न्यायिक आयोग की जांच खत्म हो गई। जनवरी 2011 में गठित आयोग अगले महीने राज्य सरकार को अपनी अंतिम रिपोर्ट सौंप सकता है।
अंतिम सुनवाई में सरकारी वकील एवाई सखरे ने आयोग को बताया कि इमारत को बिना तटीय नियमन जोन या केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय की स्वीकृति के बनाया गया है। ऐसा पहली बार है कि राज्य सरकार ने यह स्वीकार किया है कि सोसाइटी के पास पर्यावरणीय अनुमति नहीं थी। जबकि इससे पहले सरकार लगातार कहती रही है कि इमारत के निर्माण में किसी तरह के नियमों का उल्लंघन नहीं किया गया है।
आयोग के समक्ष राज्य सरकार ने यह भी कहा कि सोसाइटी को 31 मंजिला नहीं बनाना चाहिए था, क्योंकि उस पर लागू विकास नियंत्रण नियमन, 1967 इसकी अनुमति नहीं देता। राज्य सरकार ने कहा कि मुंबई कोलाबा इलाके में स्थित इस इमारत को 46.5 मीटर तक ही बनाया जा सकता था जो वर्तमान में 100.7 मीटर है।
इस आयोग की अध्यक्षता बंबई हाईकोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश जेए पाटिल कर रहे हैं जिसकी स्थापना 8 जनवरी, 2011 को की गई थी। आयोग ने अपनी अंतरिम रिपोर्ट में पिछले साल कहा था कि जिस जमीन पर विवादास्पद इमारत खड़ी है, वह राज्य सरकार की है न कि रक्षा मंत्रालय की।
इसके अलावा आयोग ने यह भी कहा था कि यह जमीन कारगिल की युद्ध विधवाओं, युद्ध के वीरों और उनके संबंधियों के लिए आरक्षित नहीं है।